गोपेश्वर। पोखरी ब्लाॅक के चमेठी स्थित मां चंडिका की उत्सव डोली 251 वर्षो के लंबे अंतराल के बाद गर्भगृह से बाहर निकलकर बन्याथ यात्रा को रवाना हो गई।
मंगलवार को ऐतिहासिक धार्मिक परंपरा के तहत 251 वर्षों बाद मां चंडिका गर्भगृह से बाहर निकलीं। ब्रह्म स्वरूप में बाहर आकर मां ने भक्तों को दिव्य दर्शन दिए और 9 माह की बन्याथ यात्रा को रवाना हुईं। इस ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान के साक्षी बनने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े।
ब्रह्म गुरु दीपक कुंवर की अगुवाई में सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर यह अनुष्ठान संपन्न हुआ। 84 गांवों की आराध्य देवी मां चंडिका के गर्भगृह से बाहर निकलते ही मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और जनकल्याण की कामना की। 251 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद मां के गर्भगृह से बाहर आने को लेकर क्षेत्रवासियों में खासा उत्साह और आस्था देखने को मिली। मां की बन्याथ यात्रा शुरू होने के साथ ही चमेठी सहित आसपास के गांवों में भक्तिमय माहौल छा गया। ब्रह्म गुरु दीपक कुंवर ने कहा कि 251 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद चमेठी की मां चंडिका ब्रह्म स्वरूप में गर्भगृह से बाहर आकर भक्तों को दर्शन दे रही हैं। मां नौ माह के लिए बन्याथ यात्रा पर निकली हैं। उन्होंने इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं से यात्रा को सफल बनाने में सहयोग की अपील की।
बन्याथ समिति के अध्यक्ष जगदीश सिंह रावत ने इसे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अवसर बताते हुए सभी क्षेत्रवासियों से आयोजन में बढ़-चढ़कर सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मां चंडिका की यह बन्याथ यात्रा क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
इस अवसर पर ब्रह्म गुरु दीपक कुंवर, भगवंती जोशी, राजेश कांडपाल, देवरा यात्रा समिति के अध्यक्ष जगदीश सिंह रावत, महासचिव भरत बिष्ट, कोषाध्यक्ष कुंवर सिंह चैधरी, दीपक चैधरी, मातबर सिंह रावत, राजेंद्र पंत, अनंतराम भट्ट, मंदिर समिति के संरक्षक लक्ष्मी प्रसाद पंत, मयंक पंत, संदीप पंत, मंदोदरी पंत, महिला मंगल दल की अध्यक्ष पुष्पा पंत, गजेंद्र दीवान, फतेराम सती, आनंद सिंह रावत, आशा देवी, बबीता देवी, पुष्पा देवी और विशेश्वरी पंत समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
चमेठी की चंडिका देवी 251 वर्षों बाद बन्याथ यात्रा पर निकलीं
