बदरीनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर को शीतकाल के लिए होंगे बंद

बदरीनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर को शीतकाल के लिए होंगे बंद

गोपेश्वर। भारत के चारधामों में से एक बदरीनाथ के कपाट आगामी 16 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे। इसके साथ ही कपाट बंद होने से पूर्व पंच पूजाओं के कार्यक्रम की भी घोषणा कर दी गई है।
12 नवंबर से शुरू होंगी पंचपूजाएं
बदरीनाथ धाम में मंगलवार को विजयदशमी के पर्व पर कपाट बंद होने की परंपराओं का निर्वहन करते हुए धर्माधिकारी स्वयंबर सेमवाल, वेदपाठी डा रवीन्द्र भट्ट, आचार्य वाणी विलास डिमरी ने पूजा-अर्चना तथा पंचांग गणना के पश्चात कपाट बंद होने की तिथि विनिश्चय की। इसके बाद रावल अमर नाथ नम्बूदरी ने आगामी 16 नवंबर को सायं 9 बजकार 37 मिनट पर बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने की घोषणा की। इसके साथ ही मंदिर के कपाट बंद होने से पूर्व होने वाली पंच पूजाओं के कार्यक्रम की भी घोषणा कर दी गई। इसके तहत 12 नवंबर को भगवान गणेश की भोग पूजा के बाद सायं कपाट बंद कर दिए जाएंगे। 13 को आदिकेदारेश्वर मंदिर व शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद होगें। 14 को खड्ग पुस्तक पूजन और वेद ऋचाओं का वाचन बंद होगा। चैथे दिन 15 को माता लक्ष्मी जी को कढाई भोग अर्पण तथा भगवान बदरीविशाल के दरबार में आने का न्योता दिया जायेगा 16 नवंबर को श्री लक्ष्मी जी श्री बदरीनाथ मंदिर गर्भ गृह में प्रस्थान करेंगी और श्री कुबेर जी तथा उद्धव जी मंदिर परिसर में आ जायेंगे। इसके साथ ही इसी दिन 16 नवंबर को रात 9.37 बजे मंत्रोच्चार और विधिविधान के साथ बदरीविशाल के मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
विजयादशमी के पर्व पर ही बीकेटीसी द्वारा यात्रा वर्ष 2027 के लिए श्री बदरीनाथ धाम की भंडार व्यवस्था संचालन हेतु पगड़ी भेंट की गयी। इसके तहत मेहता थोक से उमेश भट्ट,शिवम मेहता तथा कमदी-भंडारी थोक से महेंद्र भंडारी तथा जगदीश पंवार को पगडी भेंट की गयी।
बीकेटीसी के मीडिया प्रभारी डाॅ. हरीश गौड़ ने बताया कि कपाट बंद होने के दूसरे दिन 17 नवंबर सुबह श्री उद्धव जी तथा श्री कुबेर जी और शंकराचार्य की गद्दी योग बदरी पांडुकेश्वर प्रस्थान करेंगे। शीतकाल में श्री उद्धव जी एवं कुबेर जी की पूजा पांडुकेश्वर में ही होगी। श्री गरूड़ जी तथा आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी के श्री नृसिंह मंदिर ज्योर्तिमठ प्रस्थान करेंगे।गरूड़ जी 17 नवंबर सीधे ज्योर्तिमठ प्रस्थान करेंगे जबकि रावल जी, नायब रावल जी आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी के साथ श्री योग बदरी पांडुकेश्वर में प्रवास करेंगे तथा 18 नवंबर को आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी श्री नृसिंह मंदिर ज्योर्तिमठ में विराजमान हो जायेगी। इसी के साथ इस यात्रा वर्ष 2026 की श्री बदरीनाथ यात्रा का समापन होगा।
इस अवसर पर श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष ऋषिप्रसाद सती व विजय कपरवाण, पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, प्रह्लाद पुष्पवान, राजेन्द्र डिमरी, रजनीश भट्ट व बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ पूर्व सदस्य भास्कर डिमरी दंडी स्वामी मुकुंदानंद सरस्वती महाराज,पूर्व उपाध्यक्ष किशोर पंवार , प्रोटोकॉल अधिकारी राकेश सेमवाल, मंदिर अधिकारी यदुवीर पुष्पवान, डा. हरीश गौड़ जगमोहन बर्त्वाल, संतोष तिवारी, पंडापंचायत अध्यक्ष प्रवीण ध्यानी, उपाध्यक्ष सुधाकर बाबुलकर माणा पंचायत प्रधान पीतांबर मोल्फा, बाबा उदय सिंह रावत, अतुल डिमरी, संजय तिवारी,राहुल नेगी, सत्येंद्र चैहान समेत डिमरी पंचायत, ब्रह्म कपाल तीर्थ पुरोहित पंचायत, हकहकूकधारी संगठनों के प्रतिनिधि एवं बीकेटीसी के अधिकारी कर्मचारी समेत श्रद्धालु मौजूद रहे।

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