गोपेश्वर। सिमली बेस अस्पताल को लेकर अब 11 अक्टूबर से देहरादून तक पद यात्रा को लेकर ग्रामीण लामबंद होने लगे हैं। इसके चलते विधानसभा चुनाव से ठीक पूर्व सिमली बेस अस्पताल का जिन्न बाहर आने से सियासत के गर्म होने के आसार बढ़ गए हैं।
दरअसल पूर्व डिप्टी स्पीकर दिवंगत डाॅ. अनुसूया प्रसाद मैखुरी ने कर्णप्रयाग के विधायक रहते हुए सिमली में बेस हाॅस्पिटल को मंजूरी दिलाई थी। इसके चलते सिमली बेस अस्पताल का भवन काफी पहले तैयार तो हो गया किन्तु बेस अस्पताल का सपना अभी भी साकार नहीं हो पाया है। मुख्यमंत्री रहते हुए विजय बहुगुणा ने यह घोषणा की थी। उसके बाद इसे महिला बेस चिकित्सालय का रूप दिया गया। यह सब चलता ही रहा कि बेस चिकित्सालय तो सिमली में नहीं बन पाया किन्तु बाद को उप जिला चिकित्सालय बना दिया गया। इसको लेकर आक्रोशित होकर सड़कों पर उतर आए। तब भवन के आगे बेस चिकित्सालय का बोर्ड लगा दिया गया। इसके बावजूद अभी तक भी बेस चिकित्सालय अस्तित्व में नहीं आ पाया है।
बेस अस्पताल निर्माण को लेकर संघर्ष समिति का गठन भी किया गया। लगातार चलाए जा रहे आंदोलन के बावजूद अभी तक भी हालात जस के तस बने हुए हैं। अब जबकि विधानसभा के चुनाव सिर पर हैं तो बेस अस्पताल का मामला भी गर्म हो चला है।
बेस अस्पताल निर्माण संघर्ष समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नेगी ‘मुन्ना भाई’ ने कहा कि अब बेस अस्पताल को लेकर आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। इसके तहत 11 अक्टूबर से सिमली से देहरादून तक पद यात्रा निकाली जाएगी। 11 को सिमली में मां चड़िका देवी का आशीर्वाद लेकर पदयात्रियों का हुजूम देहरादून को रवाना होगा। हालांकि कर्णप्रयाग तक महिलाएं भी पद यात्रा में शामिल होंगी। इसके बाद 100-150 पदयात्री देहरादून को रवाना होंगे। पदयात्री शासनादेश लेकर ही वापस लौटेंगे। उन्होंने कहा कि यदि शासनादेश नहीं जारी हुआ तो ‘बेस नही ंतो वोट नहीं’ का नारा बुलंद होगा। इस बीच किसी भी राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों को गांवों में घुसने नहीं दिया जाएगा। उनका कहना है कि वर्षो-वर्षो से बेस हाॅस्पिटल की लड़ाई लड़ी जा रही है। अब तो आर पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
इस तरह सिर पर आते विधानसभा चुनाव के चलते बेस अस्पताल को लेकर सियासत के गर्म होने के आसार बढ़ गए हैं। खासकर सत्तारूढ़ दल के लिए बेस हाॅस्पिटल का मसला परेशानी का सबब बन सकता है।
सिमली बेस हाॅस्पिटल का जिन्न फिर बाहर आया, 11 से पदयात्रा
