रात के अंधेरे में गाँव के भरोसे की रोशनी बना अमर सिंह

रात के अंधेरे में गाँव के भरोसे की रोशनी बना अमर सिंह

गोपेश्वर। जिला मुख्यालय गोपेश्वर से सटे घिंघराण गांव की सुरक्षा का जिम्मा ग्राम प्रहरी अमर सिंह ने उठाया है। रात को अंधेरे में अमर सिंह ही इस जनजाति गांव की अकेले ही रखवाली कर रहा है।
दरअसल घिंघराण गांव में जनजाति के परिवार निवास करते है। ग्रीष्मकाल में जनजाति के परिवार बदरीनाथ के माणा तथा अन्य स्थानों में प्रवास कर शीत काल में घिंघराण गांव के प्रवास पर लौट आते हैं। इसके चलते ग्रीष्मकाल में पूरा गांव खाली हो जाने के चलते सन्नाटा सा पसर जाता है। ऐसा इसलिए भी कि ग्रीष्मकालीन प्रवास के चलते लोग आजीविका के लिए अपने मूल गांव माणा और अन्य इलाकों में ही रहते हैं। इसके चलते गांव की सुरक्षा का जिम्मा ग्राम प्रहरी अमर सिंह ने उठा रखा है। इन दिनों गिने चुनें परिवार ही यहां रहते हैं। दिन ढलते ही गांव की गलियों में सन्नाटा सा पसरने लगता है। गिने चुने परिवारों के लोग घरों के दरवाजे बंद कर देते हैं। इसी सन्नाटे के बीच ग्राम प्रहरी अमर सिंह की एक तरह से सुरक्षा की ड्यूटी प्रारंभ हो जाती है। वह गांव के प्रति सुरक्षा का फर्ज निभाकर हर रात गांव में गस्त तो लगाता ही है अपितु बंद पड़े घरों और आसपास के क्षेत्रों पर भी नजर टिकायें रखता हैं किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस तक पहुंचाने के लिए सजग रहता है। कहा जा सकता है कि जब लोग आजीविका के लिए अपने मूल गांव में रहते है तो उनकी घरों की जिम्मेदारी निभाने वाला अमर सिंह हर रात गांव में मौजूद रहता है।
चमोली थाना प्रभारी नवनीत सिंह भंडारी के अनुसार अमर सिंह पढ़े लिखे होने के चलते पहले प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर चुके हैं। इसके बावजूद जीवन में उन्हें ग्राम प्रहरी की जिम्मेदारी मिली है तो वह उसका बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। अमर सिंह के अनुसार कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। बड़ी बात यह है कि जिसको जो जिम्मेदारी मिलती है तो उसे ईमानदारी से जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए। यही वजह है कि रात के घटाटोप अंधेरे में सन्नाटे के बीच जब गांव की ज्यादार खिड़कियों में भी अंधेरा पसर जाता है तो तब अमर सिंह की नजर हर गली और हर रास्ते पर होती है। उनकी यह गश्त सिर्फ रास्तों पर चलना नहीं अपितु गांव से बहार गए परिवारों के भरोसे की रखवाली करना है।

घिंघराण गांव की सुरक्षा का जिम्मा ग्राम प्रहरी के भरोसे
हालांकि पुलिस व्यवस्था में ग्राम प्रहरी की भूमिका भले ही छोटी नजर आए किन्तु गाँव की सुरक्षा में इसकी अहमियत बड़ी है। थाना प्रभारी नवनीत भण्डारी ने अमर सिंह से संवाद किया तो उन्होंने बताया कि वह अपने गाँव और अपनी मिट्टी से जुड़े रहना चाहता हैं।
अमर सिंह की कहानी सिर्फ एक ग्राम प्रहरी की ड्यूटी की कहानी नहीं, बल्कि अपने गाँव, अपनी मिट्टी और अपनी जिम्मेदारी से जुड़े रहने की कहानी है। उनका यह सफर बताता है कि सेवा के लिए हमेशा बड़ी कुर्सी जरूरी नहीं होती। कभी-कभी एक टॉर्च लेकर रात के अंधेरे में गाँव की गलियों से गुजरता एक ग्राम प्रहरी भी पूरे गाँव के भरोसे की रोशनी बन जाता है।

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