गोपेश्वर। बहु प्रतीक्षित सैंजी-लगा डुमक मोटर मार्ग की वन भूमि हस्तांतरण आपत्ति का तथ्यों के आधार पर निस्तारण करने की कवायद शुरू हो गई है। इसके तहत पुराने मानचित्रों से वन भूमि की स्थिति का मिलान करने को डीएम गौरव कुमार ने अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए हैं। इससे दूरस्थ डुमक गांव के ग्रामीणों का सड़क से जुड़ने का सपना साकार होने की दिशा में बढ़ने लगा है।
बताते चलें कि सोमवार को जनता मिलन कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों द्वारा सैंजी-लगा डुमक मोटर मार्ग के वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित फरियाद जिलाधिकारी गौरव कुमार के समक्ष रखी गई थी। डीएम ने फरियाद का संज्ञान लेते हुए प्रकरण से जुड़े सभी हितधारकों के साथ बैठक आयोजित कर तथ्यों एवं अभिलेखों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करनी शुरू कर दी है।
जिलाधिकारी गौरव कुमार की अध्यक्षता में गुरूवार को सैंजी-लगा डुमक मोटर मार्ग के वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित प्रकरण के संबंध में सबंधित विभागों तथा ग्रामीण प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। उन्होंने मोटर मार्ग निर्माण के लिए वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े सभी बिंदुओं का विस्तृत अवलोकन कर संबंधित विभागों एवं ग्रामीण प्रतिनिधियों के पक्ष एवं चिंताओं को सुना। संबंधित अधिकारियों से प्रकरण में अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी लेते हुए सभी हितधारकों की शंकाओं एवं आपत्तियों का तथ्यों के आधार पर निराकरण करने के निर्देश दिए।
इस दौरान डीएम ने वर्ष 1920 के वन विभाग के मानचित्र, वर्ष 1930 के बंदोबस्ती मानचित्र तथा वर्ष 1956 के मानचित्रों का अवलोकन करते हुए संबंधित क्षेत्र में वन, राजस्व एवं सिविल भूमि की स्थिति का मिलान किया। उन्होंने उपलब्ध अभिलेखों एवं वर्तमान स्थिति के आधार पर वन भूमि की स्थिति का स्पष्ट परीक्षण करते हुए प्रकरण का नियमानुसार समाधान सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
जिलाधिकारी ने पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को फाइनल एलाइनमेंट के अनुसार वर्तमान में दर्ज आपत्ति का तथ्यों एवं अभिलेखों सहित परीक्षण कर स्पष्ट आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही, उपजिलाधिकारी जोशीमठ को भी प्रकरण में आवश्यक राजस्व संबंधी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि मोटर मार्ग निर्माण से संबंधित वन भूमि हस्तांतरण के प्रकरण में सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और उपलब्ध अभिलेखों एवं तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। इससे इस लंबित प्रकरण का जल्द समाधान तो होगा ही अपितु ग्रामीणों को सड़क मार्ग से जोड़ने की दिशा में सफलता भी मिलेगी।
गौरतलब है कि वर्ष 1980 से इस मार्ग के निर्माण की कवायद चल रही है। इसके बावजूद दूरस्थ डुमक गांव अभी सड़क मार्ग से नहीं जुड़ पाया है। ग्रामीण करीब 18 किमी पैदल चलकर जीवन संघर्ष के लिए जूझ रहे हैं। लगातार आंदोलन के बावजूद एक अदद सड़क का मामला तकनीकी पेंच में फंसा पड़ा है। इसके लिए ग्रामीण कई बार चुनाव बहिष्कार भी कर चुके हैं। बावजूद इसके ग्रामीणों का सड़क से जुड़ने का सपना साकार नहीं हो पाया है।
इस दौरान केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के उप वन संरक्षक रजत सुमन, अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश, जोशीमठ के एसडीएम चंद्रशेखर वशिष्ठ समेत पीएमजीएसवाई, राजस्व विभाग के अधिकारी एवं ग्रामीण प्रतिनिधि मौजूद रहे।
सैंजी-लगा डुमक मोटर मार्ग को वन भूमि हस्तांतरण की कवायद
