गोपेश्वर। मां नंदा देवी की बड़ी जात तथा लोकजात की डोलियां 6 वें दिन अपने अपने अगले पड़ावों की ओर बढ़ती जा रही है। इसके चलते नंदा की उत्सव ड़ोलियों की जगह-जगह पुष्पवर्षा से श्रद्धालु आगवानी कर रहे हैं ।
गुरूवार को बंड की नंदा किरूली गांव, बधाण की नंदा सूना गांव और दशोली की नंदा रात्रि प्रवास के लिए सेमा गांव पहुंच गई है। फर्स्वाण फाट की दर्जनों छंतोली भी बड़ी जात में सम्मलित होने के लिए अपने अगले पड़ावों के लिए रवाना हो चुकी हैं जबकि शुक्रवार को निजमूला घाटी की दर्जनों छंतोली बड़ी जात में सम्मलित होने के लिए कैलाश की ओर प्रस्थान करेंगी। मां नंदा की तीनों डोलियों का जगह जगह भव्य स्वागत और सत्कार हो रहा है। हर कोई अपनी ध्याण से मिलकर उसके दर्शनों को पलक पांवडे़ बिछा रहा है। गांवों में ग्रामीण मां नंदा को समौण के रूप में खाजा, चूडा, बिंदी, चूडी, सहित ककड़ी, मुंगरी अर्पित कर रहे हैं और माँ नंदा का स्वागत पुष्पवर्षा से कर रहे हैं।
बंड पट्टी की नंदा की उत्सव ड़ोली कम्यार गांव के राजकोटी मंदिर से होते हुए पोधार, मल्ला किरूली होते हुए मल्ला किरूली में बंड भूमियाल मंदिर में रात्रि विश्राम के लिए पहुंची। दूसरी ओर मां राजराजेश्वरी बधाण की नंदा डोली डुंग्री गांव से कैरा मैना होते हुए रात्रि प्रवास के सूना गांव पहुंची। कुरुड दशोली की नंदा डोली मटई ग्वाड से रात्रि प्रवास के लिए पगना गांव पहुंची तो भक्तों ने पुष्पवर्षा के साथ देव ड़ोलियों की आगवानी की।
बंड भूमियाल और मां नंदा के मिलन पर छलछलाई आँखे
नंदा की बंड की उत्सव डोली कम्यार से रात्रि विश्राम के लिए बंड भूमियाल की थाती किरूली गांव पहुंची तो भूमियाल और मां नंदा के मिलन से भक्त भाव विभोर हो उठे। इस दौरान श्रद्धालुओं की आँखे छलछला उठी। इस दौरान बंड क्षेत्र और दूर दूर से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में नंदा के जयकारों और जागरों के साथ बंड भूमियाल का थान थिरक उठा। चांचणी, झुमेलो की सुमधुर लहरियों से यह गांव नंदा के रहस्य लोक में डूब गया।
मान्यता है कि मां नंदा को कैलाश जाने के लिए जब रूपकुंड से आगे ज्यूरॉगोली नामक स्थान से आगे जाने का कोई रास्ता नहीं मिल पाता है और सभी देवी देवता ज्यूरॉगोली से आगे जाने में असमर्थ हो जाते हैं तो तब बंड भूमियाल अपने अस्त्र कटार से ज्यूरॉगोली में आगे जाने का रास्ता बनाते हैं तब जाकर ही माँ नंदा वहां से आगे ताला उलारी, शिला समुद्र और होमकुंड तक प्रस्थान करती है। ज्यूरॉगोली में सभी देवताओं को कर के रूप में कुछ न कुछ देना पड़ता था लेकिन बंड भूमियाल को कोई भी कर नहीं देना पड़ता।
