धर्म, ज्ञान और भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है भागवत कथाः आचार्य चमोली

धर्म, ज्ञान और भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है भागवत कथाः आचार्य चमोली

गोपेश्वर। कथावाचक आचार्य मनोज चमोली ने कहा कि प्रत्येक पुराण मानव जीवन के विभिन्न पक्षों को दिशा देने का काम करता है। इससे धर्म, ज्ञान व भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
खल्ला गांव में मां अनसूया देवी की देवरा यात्रा के निमित्त श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक मनोज चमोली ने कथा प्रसंग पर विस्तार से रोशनी डालते हुए 18 पुराणों की संख्या का महत्व समझाया। उन्होने कहा कि प्रत्येक पुराण मानव जीवन के विभिन्न पक्षों को दिशा देने का काम करता है। इससे धर्म, ज्ञान और भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। आचार्य ने 28 कल्पों में 28 व्यासों के वर्णन को सरल शैली में प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रत्येक कल्प में एक-एक व्यास भगवान की कथा शामिल है। इससे ही सृष्टि में धर्म का अस्तित्व बना रहता है। इस दौरान भगवान वेदव्यास की महत्ता का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार वेदों और पुराणों के माध्यम से जीवन को सही मार्गदर्शन मिलता है।
कथा के दौरान भगवान श्री सुखदेव जी महाराज के दिव्य जन्म का अत्यंत भावपूर्ण एवं मार्मिक वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि सुखदेव जी जन्म से ही ब्रह्मज्ञानी थे और उन्होंने संसार के मोह-माया से दूर रहकर केवल भगवान की भक्ति में अपना जीवन समर्पित किया। उनके जीवन से हमें वैराग्य, ज्ञान और भक्ति का संदेश प्राप्त होता है।
श्रीमद् देवी भागवत महापुराण की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए आचार्य चमोली ने कहा कि यह ग्रंथ केवल एक कथा नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य मार्गदर्शक है। इसके श्रवण मात्र से मनुष्य के समस्त पापों का नाश होता है, मानसिक शांति प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने यह भी बताया कि देवी भागवत का श्रवण करने से भक्तों को देवी की कृपा प्राप्त होती है। इससे उनके जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
कथा के दौरान मौजूद श्रद्धालु भावविभोर होकर कथा का श्रवण करते रहे। इस दौरान जय मां अनसूया और जय ज्वाल्पा के उद्घोष से पंडाल गुंज उठा। आयोजन में अनुशासन, श्रद्धा एवं भक्ति का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
इस अवसर पर आचार्य श्री चंद्रशेखर तिवारी, आचार्य मनोज घनसेला, ब्रह्मानंद नौडियाल, घनानंद प्रसाद चमोली, राकेश भट्ट जी, मनीष बलोदी मौजूद रहे। सभी विद्वानों ने कथा के महत्व को सराहा और धर्म प्रचार-प्रसार के इस पुण्य कार्य की प्रशंसा की।
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ प्राप्त किया और आगामी दिनों में भी अधिक से अधिक संख्या में मौजूद रहने का संकल्प लिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *