गोपेश्वर। उत्तराखंड में उपनल तथा संविदा में सेवा दे रहे अनुसूचित जाति के कर्मियों के आरक्षण कोटे की अनदेखी पर पर्वतीय शिल्पकार कल्याण सभा भड़क गई है।
शिल्पकार सभा के जिलाध्यक्ष गिरीश आर्य, पुष्कर बैछवाल, हर्षलाल रूद्रियाल, मदन लोहानी तथा आरएस रावत ने मुख्यमंत्री को संबोंधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपकर कहा है कि पिछले कुछ समय पूर्व से उत्तराखंड में उपनल तथा संविदा के तहत सरकारी सेवा दे रहे कर्मचारियों को नियमित नियुक्ति प्रदान तो की जा रही है किन्तु इन नियुक्तियों में अनुसूचित जाति को प्रदत आरक्षण कोटे की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना था कि इससे अनुसूचित जाति के लोगों के साथ भेदभाव की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने नियुक्तियों में अनुसूचित जाति के लोगों को आरक्षण का लाभ देने की मांग की है।
पर्वतीय शिल्पकार कल्याण सभा ने सीएम से लगाई गुहार
ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य में गरीब एवं भूमिहीन शिल्पकारों को सरकारी भूमि लीज अथवा पट्टे पर आंवटित की गई थी। इसके बावजूद दशकों बीत जाने के बावजूद अभी तक भूमि का मालिकाना हक प्रदान नहीं किया गया है। इसके लिए उन्होंने शासनादेश जारी करने का आग्रह किया है। कहा कि रोजगार को लेकर भी अनुसूचित जाति के लोगों को पर्याप्त अवसर नहीं दिए जा रहे है। इससे मुख्य बाजारों अथवा सड़क किनारे की भूमि को पट्टे पर उपलब्ध करा कर औजार अथवा मशीनें अनुदान पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इससे शिल्पकार आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो सकेंगे। संविदा एवं मानदेय पर विभिन्न विभागों में 1 अप्रैल 2021 के शासनादेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
ज्ञापन में आगे कहा गया है कि चमोली जिले के दशोली ब्लाॅक के सैकोट स्थित जूनियर आश्रम पद्धति विद्यालय को तत्काल उच्चीकृत कर अध्यापकों की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए। अनुसूचित जाति/जनजाति/पिछड़ी जाति के बैकलाॅक के 25 हजार से अधिक खाली चल रहे पदों को तत्काल भरने के लिए राज्य में विशेष अभियान चलाने की भी मांग ज्ञापन में की गई है।
