गोपेश्वर। राज्य में मंगलवार को होने जा रही टीईटी परीक्षा पर प्राथमिक शिक्षक संघ ने आपत्ति जताते हुए इसे शिक्षकों के खिलाफ अन्यायपूर्ण कदम बताया है।
बताते चले कि मंगलवार को राज्य के विभिन्न केंद्रों पर टीईटी परीक्षा होने जा रही है। इस परीक्षा में उत्तराखण्ड में सेवारत शिक्षक भी अपनी सेवा बचाने के लिए परीक्षा देने जा रहे हैं। शिक्षकों ने टीईटी को लेकर आपत्ति तो जताई है किन्तु विवश होकर उन्हें परीक्षा में शामिल होना पड़ रहा है।
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह नेगी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के एक सितंबर 2025 के फैसले से देश के लगभग 25 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। उत्तराखंड में भी ऐसे लगभग 14 हजार शिक्षक हैं। इनकी नियुक्त आरटीई एक्ट-2009 के 1 अप्रैल 2010 लागू होने से पूर्व हो चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कारण इन शिक्षकों की सेवा पर भी संकट की तलवार लटक लटकी है।
शिक्षक नेता नेगी ने कहा कि प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल को बीते 13 जून को राज्य के विद्यालयी शिक्षा मंत्री एवं 4 जुलाई को मुख्यमंत्री आश्वासन दे चुके हैं कि शिक्षकों के साथ कोई अन्याय नहीं होगा। इस मामले में केंद्र सरकार से माँग की जाएगी कि 2017 में केन्द्र सरकार के आरटीई एक्ट में संशोधन पर अध्यादेश लाया जाए अथवा राज्य सरकार सेवारत प्रभावित शिक्षकों के लिए विशेष विभागीय टीईटी आयोजित करेगी। इसके बावजूद राज्य सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाए गए। इस कारण शिक्षकों को लंबी सेवा के बाद इस परीक्षा में शामिल होने को विवश होना पड़ रहा है। वर्षों की सेवा का अनुभव और उम्र के इस पड़ाव में इस निर्णय से शिक्षक डिप्रेशन में हैं। यदि शीघ्र शिक्षकों को इस संकट से निजात नहीं दिलाया गया तो शिक्षक सड़कों पर उतरने को विवश होंगे।
