गोपेश्वर। मां नंदा देवी की देवडोलियां गर्भगृह में विराजमान हो गई हैं।
दरअसल मां नंदा की लोकजात यात्रा के तहत बधाण की नंदा की देवडोली बेदनी तक गई थी। बेदनी से वापस आने के बाद शुक्रवार को हवन तथा पूजा अर्चना के पश्चात मां नंदा राजराजेश्वरी की मूर्ति को देवराड़ा स्थित मंदिर में प्रतिष्ठापित किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना में प्रतिभाग कर देवी का आशीर्वाद लिया।
बताते चलें कि बधाण की मां राजराजेश्वरी की देवडोली नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से लोकजात यात्रा के तहत बेदनी कुंड तक गई थी। बेदनी कुंड में पूजा अर्चना के पश्चात देवडोली अपने ननिहाल देवराड़ा पहुंची। शुक्रवार को धार्मिक रीति रिवाजों के बीच मां राजराजेश्वरी गर्भगृह में विराजमान हो गई। मां राजराजेश्वरी अब 6 माह देवराड़ा में ही रहेगी। इसके 6 माह बाद राजराजेश्वरी नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ को रवाना होगी। इस तरह बधाण की राजराजेश्वरी अगले 6 माह कुरूड़ मंदिर में रहेगी।
नंदा की दशोली तथा बंड की देवडोलियां भी इससे पूर्व गर्भगृह में विराजमान हो गई हैं। पूजा अर्चना तथा हवन के पश्चात दशोली की मां नंदा की मूर्ति को गर्भगृह में प्रतिष्ठापित किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना और हवन में प्रतिभाग कर मां का सुफल ग्रहण किया। बंड की नंदा की डोली भी कुरूड़ में ही विराजमान हो गई है। इस बार नंदा की बड़ी जात में दशोली तथा बंड की देवडोलियों संग छंतोलियां उच्च हिमालय में स्थित होमकुंड तक गई थी। होमकुंड में चैसिंग्या खाडू के कैलास विदाई के बाद देवडोलियां सकुशल कुरूड़ लौट आई। इस तरह नंदा की बड़ी जात तथा लोकजात यात्रा का समापन भी हो गया है।
