गोपेश्वर। पशुपालन विभाग में राज्य बनने के बाद अभी तक भी फार्मेसी संवर्ग का पुनर्गठन नहीं हो पाया है। पुनर्गठन न होने से फार्मेसी संवर्ग के कर्मचारी मायूस हो चले है।
दरअसल उत्तराखंड में पशुपालन विभाग में फार्मेसी संवर्ग की एक तरह से उपेक्षा ही हो रही है। उत्तराखंड राज्य बनने के 26 बरस बाद भी फार्मेसी संवर्ग का पुनर्गठन नहीं हो पाया है। मौजूदा समय में फार्मेसी संवर्ग में पशु चिकित्सा फार्मेसी अधिकारी के 331 और मुख्य पशु चिकित्सा फार्मेसी अधिकारी के 26 पद सृजित हैं। उत्तराखंड के एक मात्र लघु पशु रेफरल सेंटर (श्वान एवं बिल्ली), ट्रांसपोर्ट नगर देहरादून में एक मुख्य पशु चिकित्सा फार्मेसी अधिकारी का पद स्वीकृत है जबकि वहां पर 2 पशु चिकित्सा फार्मेसी अधिकारी के पद सृजित होने चाहिए थे।
पशुपालन विभाग में राज्य बनने के बाद पुनर्गठन नहीं
वेटनरी फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष संजय चैहान ने बताया कि उत्तराखंड में पशुपालन विभाग में फार्मेसी संवर्ग की घोर उपेक्षा हो रही है। फार्मेसी संवर्ग की विभिन्न मांगे बरसों से लंबित पड़ी हुई है। बिगत एक साल से मुख्य फार्मेसी अधिकारी के खाली पदों पर पदोन्नति नहीं हुई है। उत्तराखंड राज्य बने 26 साल हो गए हैं लेकिन अभी तक फार्मेसी संवर्ग का पुनर्गठन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पुनर्गठन न होने से अधिकांश पशु चिकित्सा फार्मेसी अधिकारी एक ही पद से सेवानिवृत हो रहें हैं। 35 से 40 साल की राजकीय सेवा के बाद जिस पद पर नियुक्ति हुई थी सेवानिवृति भी उसी पद से हो रही है। उन्होंने मांग की अतिशीघ्र फार्मेसी संवर्ग का पुनर्गठन होना चाहिए।
वेटनरी फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रांतीय महामंत्री शिवराज सिंह नेगी ने कहा कि फार्मेसी संवर्ग में स्पष्ट जॉब चार्ट न होने से पशु चिकित्सालयों में फार्मेसी अधिकारियों पर कार्यों का अत्यधिक दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने फार्मेसी संवर्ग का पुनर्गठन और स्पष्ट जॉब चार्ट बनाने की मांग की है।
