चमोली जिले में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति पर रहेगा जोर: डीएम

चमोली जिले में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति पर रहेगा जोर: डीएम

गोपेश्वर। चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने स्वच्छ एवं गुणवतापूर्ण पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
जनपद में स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निमित डीएम गौरव कुमार की अध्यक्षता में जल संस्थान, जल निगम, नगर निकायों एवं चिकित्सा विभाग से समेत अन्य सम्बंधित विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक में उन्होंने अधिकारियों को पेयजल की गुणवत्ता की नियमित निगरानी करने तथा किसी भी स्तर पर दूषित पेयजल की संभावना को तत्काल समाप्त करने के निर्देश दिए। गोपेश्वर, जोशीमठ एवं बद्रीनाथ में सीवर लाइन एवं पेयजल आपूर्ति लाइन के इंटरसेक्शन प्वाइंट का चिन्हीकरण करने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि सीवर एवं पेयजल लाइनों में कहीं भी किसी प्रकार का लीकेज नहीं होना चाहिए। दोनों लाइनों के बीच किसी भी तरह का रिसाव अथवा संपर्क होने की स्थिति उत्पन्न होने नहीं दिया जाना चाहिए।

स्रोत से घर तक स्वच्छ पेयजल की गुणवत्ता की होगी जांच
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि जनपद में पेयजल की गुणवत्ता की जांच के लिए दो विभागीय प्रयोगशालाएं संचालित हैं। इसमें चमोली में जिला स्तरीय प्रयोगशाला तथा कर्णप्रयाग में उप-जिला स्तरीय प्रयोगशाला शामिल है। जनपद के 1,113 गांवों में 1,756 पेयजल स्रोतों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति की जा रही है।
डीएम गौरव कुमार ने ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जल समितियों की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल पेयजल स्रोतों से ही नहीं अपितु घरों तक पहुंचने वाले पानी के भी रैंडम सैंपल लिए जाने चाहिए। इससे स्रोत से लेकर उपभोक्ता तक पेयजल की गुणवत्ता की वास्तविक स्थिति का पता चल सकेगा।
अधिकारियों को निर्देश देते हुए डीएम ने कहा कि पेयजल स्रोतों को किसी भी प्रकार के प्रदूषण से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। संबंधित क्षेत्रीय अधिकारी पेयजल स्रोतों का नियमित निरीक्षण करेंगे और यदि कहीं भी दूषित होने की संभावना दिखाई देती है तो तत्काल कार्रवाई करेगें। पेयजल गुणवत्ता जांच प्रयोगशालाओं को आवश्यक संसाधनों एवं तकनीकी व्यवस्थाओं के साथ अपडेट रखने के निर्देश देते हुए उनका कहना था कि इससे जांच के आंकड़े सटीक एवं विश्वसनीय प्राप्त हो सकेंगे।
नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों को नगरीय क्षेत्रों में ऐसे स्थानों को चिन्हित करने के निर्देश दिए गए जहां पेयजल के दूषित होने की संभावना हो। उन्होंने कहा कि संभावित जोखिम वाले स्थानों की नियमित निगरानी करते हुए आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
बैठक में जल निगम के अधिशासी अभियंता राजेश सिंह, जल संस्थान के अधिशासी अभियंता संजय कुमार सैनी, एसीएमओ डॉ. अभिषेक गुप्ता, अधिशासी अधिकारी अनिल कुमार पंत व बीना नेगी समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *