गोपेश्वर। मां नंदा की बड़ी जात में शामिल डोलियां गर्भगृह में विराजमान हो गई हैं। इसके साथ ही 5 सितंबर से चली बड़ी जात का समापन भी हो गया है।
दरअसल इस साल 5 सितंबर से शुरू हुई मां नंदा की बड़ी जात यात्रा का आयोजन किया गया था। उच्च हिमालय से नंदा की बड़ी जात यात्रा में शामिल दशोली की मां नंदा तथा बंड की मां नंदा की डोली बुधवार को नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ मंदिर पहुंच गई थी।
गुरूवार को धार्मिक पूजा अर्चना और अनुष्ठान के बीच दशोली की मां नंदा की डोली को गर्भगृह में विराजमान किया गया। पंडित मुंशी चंद्र गौड़ तथा दिनेश चंद्र गौड़ आदि ब्राह्मणों ने धार्मिक परंपराओं और रीतिरिवाजों के बीच नंदा की उत्सव डोली की मूर्तियों को गर्भगृह में प्रतिष्ठापित किया। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर मां नंदा के जयकारों से गूंज उठा। बंड की नंदा की उत्सव डोली को धार्मिक पूजा अर्चना के बीच प्रतिष्ठापित कर दिया गया। इस अवसर पर मां नंदा की बड़ी जात के कुशलता पूर्वक संपन्न होने पर इसे मां नंदा का आशीर्वाद बताया गया।
इस दौरान नंदा बड़ी जात समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत, मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखवीर सिंह रौतेला, प्रधान हेमा गौड़, बीडीसी मेंबर देवेश्वरी गौड़ समेत तमाम श्रद्धालु और गणमान्य लोग मौजूद रहे। इसके साथ ही मां नंदा की बड़ी जात का समापन भी हो गया है। इस अवसर पर कर्नल हरेंद्र सिंह रावत तथा सुखवीर सिंह रौतेला ने बड़ी जात यात्रा के संचालन में सभी लोगों द्वारा दिए गए सहयोग पर आभार जताया है। उन्होंने कहा कि आम लोगों के सहयोग से ही यह यात्रा कुशलता पूर्वक संपन्न हो पाई है।
मां नंदा की देवडोलियां गर्भगृह में विराजमान
