गोपेश्वर। चमोली जिले के दूरस्थ वांण गांव की बेटी भागीरथी बिष्ट ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर एक बार फिर रजत पदक हासिल कर उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। हैदराबाद में आयोजित मैराथन दौड़ में 24 वर्षीय भागीरथी ने 42 किलोमीटर की लंबी दौड़ महज 2 घंटे 51 मिनट में पूरी कर दूसरा स्थान हासिल कर रजत पदक अपने नाम किया। इस उपलब्धि पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी ने भागीरथी को मेडल प्रदान कर सम्मानित किया।
पहाड़ के दुर्गम वांण गांव से से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की मैराथन में अपनी पहचान बनाने वाली भागीरथी की सफलता से उत्तराखंड समेत चमोली जिले और देवाल क्षेत्र में खुशी की लहर दौड पड़ी है।
ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों के बावजूद भागीरथी ने जिस तरह अपनी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है उससे वह अन्य बेटियों के लिए भी प्रेरणादायक बन गई है।
भागीरथी के कोच हिमाचल प्रदेश के सिरमौर निवासी और अंतरराष्ट्रीय मैराथन एथलीट सुनील शर्मा ने बताया कि भागीरथी ने 42 किलोमीटर की मैराथन दौड़ 2 घंटे 51 मिनट में पूरी कर दूसरा स्थान हासिल किया। उन्होंने बताया कि भागीरथी लगातार कड़ी मेहनत और अनुशासन के साथ प्रशिक्षण ले रही हैं। इससे पूर्व भी वह ईरान में आयोजित 42 किलोमीटर की मैराथन में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित कई मैराथन प्रतियोगिताओं में भाग लेकर इस बेटी ने शानदार प्रदर्शन किया है।
अब नजर ओलंपिक खेलों पर
भागीरथी के कोच सुनील शर्मा ने बताया कि भागीरथी का लक्ष्य केवल राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतना नहीं है। उसका सपना ओलंपिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व कर मैराथन दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल कर भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन करना है। कहा कि भागीरथी में प्रतिभा के साथ मेहनत करने का जज्बा भी है। कठिन परिस्थितियों से निकलकर यहां तक पहुंचना उसकी मजबूत इच्छाशक्ति को दर्शाता है। भागीरथी की उपलब्धि पहाड़ की उन बेटियों के लिए प्रेरणादायक है। वह सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का हौसला रखती हैं। वाण गांव की पगडंडियों से शुरू हुआ भागीरथी का दौड़ का सफर अब अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुका है। हैदराबाद में जीता गया रजत पदक इस बेटी के लिए एक और बड़ी उपलब्धि है।
चमोली के वाण की भागीरथी ने मैराथन में जीता रजत
