साल 2026ः चमोली के सरकारी अमले के सामने चुनौतियां ही चुनौतियां

रजपाल बिष्ट
गोपेश्वर। मौजूदा 2026 के साल में चमोली के सरकारी अमले के सामने चुनौतियां ही चुनौतियां रहेंगी। एक तरह से यह साल सरकारी अमले की अग्नि परीक्षा का साल भी रहेगा।
दरअसल चमोली जिले में ही स्थित उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण में फरवरी अथवा मार्च प्रथम सप्ताह में विधान सभा का बजट सत्र होने की संभावना है। इसके चलते चार-छह दिन चलने वाले इस सत्र को लेकर चमोली के सरकारी अमले को व्यवस्था जुटाने के लिए तैयारियों को रात-दिन एक करना पड़ेगा। इसके चलते पूरा गैरसैण अथवा भराड़ीसैण सरकारी कारिंदों की तैनाती का केंद्र रहेगा। इस दौरान तमाम व्यवस्थाओं को जुटाने के साथ ही सुरक्षा व्यवस्था के मोर्चे पर भी सरकारी अमले को डटा रहना पड़ेगा। चूंकि मौजूदा साल चुनावी तैयारियों साल भी है तो विपक्षी पार्टिंयां विधान सभा सत्र के दौरान तमाम सवालों को लेकर विधान सभा कूच में भी भागीदारी करेंगी। ऐसे में चुनाव के बहाने शक्ति प्रदर्शन में जुटे राजनीतिक दलों को अपनी ताकत दिखाने के लिए विधान सभा कूच जेसे कार्यक्रमों को चुनावी रिहर्सल के रूप में देखने को मिलेगा। इसलिए सुरक्षा जैसे सवाल को लेकर सरकारी अमले को काफी चैकस और सर्तक रहना होगा। माननीयों के लिए व्यवस्था जुटाने के साथ ही भराड़ीसैण में तैनात रहने वाले सरकारी कारिंदों की आवासीय व्यवस्था को बेहतर बनाने की चुनौती अलग से बनी रहेगी। यानि सरकारी अमले की यह पहली अग्नि परीक्षा भी होगी।
बजट सत्र निपटने के बाद सरकारी अमले को चारधाम यात्रा तैयारियों में जुटना होगा। इसी दौर में नंदादेवी राजजात यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप भी देना होगा। यानि की इस तरह की दोहरी चुनौती से जिला प्रशासन को जूझना पड़ेगा। अगस्त तथा सितंबर माह में हिमालयी महाकुंभ के रूप में संचालित होने वाली नंदादेवी राजजात यात्रा के सकुशल निर्वहन की बड़ी चुनौती भी सरकारी अमले के सम्मुख रहेगी। खासकर वर्ष 2014 में आयोजित नंदा राजजात में जिस तरह आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा था उसी तरह का सैलाब इस बार उमड़ने की संभावना बनी है। पिछले अनुभवों को लेकर राजजात यात्रा का संचालन करने की अग्नि परीक्षा कोई आसान भी नहीं है। उच्च हिमालय के निर्जन पडावों तक चलने वाली 280 किमी पैदल इस यात्रा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता और निर्वाध यात्रा की चुनौती से सरकारी कारिंदों को दो-चार होना पड़ेगा। हालांकि सरकारी अमला अभी से राजजात तैयारियों में जुट गया है। इसके बावजूद राजजात यात्रा को लेकर नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ के वाशिदों ने जिस तरह पहले ही विवाद खड़ा कर दिया है। उसके चलते कुरूड़ की उत्सव डोली को राजजात यात्रा का अभिन्न अंग मानने पर ही यह यात्रा विवादों से दूर रह सकेगी। इसलिए सभी पक्षों को साथ लेकर ही यात्रा को विवादों से दूर रखा जा सकता है। वैसे भी मौसम अब हर साल मानसून के दौरान रंग दिखाता जा रहा है। ऐसे में अगस्त तथा सितंबर माह मानसून के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण होंगे। सरकार के लिए भी इस यात्रा को बेहत्तर ढंग से संचालित कर लोगों का दिल जीतना होगा। इस कसौटी पर चमोली के सरकारी अमले को खरा उतरना होगा।
नंदा राजजात निपटने के पश्चात उत्तराखंड विधान सभा के चुनाव की अक्टूबर अथवा नवंबर माह में होने की संभावना के चलते विधान सभा चुनाव की चुनौती भी इस बार सरकारी अमले के सामने खड़ी हो गई है। हरिद्वार में 2027 में आयोजित होने वाले अर्द्धकुंभ के चलते चुनाव समय से पूर्व होने की संभावनाओं को बल मिलता जा रहा है। इस तरह के हालातों के चलते सरकारी अमले को समूचे राज्य में चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपादित करने की चुनौती बनी रहेगी। वैसे भी अक्टूबर अथवा नवंबर माह मौसम के लिहाज से बेहद अनुकूल माना जाता है। पहाड़ों में तो इस अवधि में मौसम काफी अनुकूल बना रहता है। चुनावी लिहाज से मौसम की अनुकूलता सरकारी कारिंदों को चुनाव संचालित करने में मददगार साबित हो सकती है। पिछले विधान सभा के फरवरी अथवा मार्च प्रथम सप्ताह में हुए चुनाव में बर्फवारी के चलते वोटरों को तो परेशानी झेलनी पड़ी ही अपितु पोलिंग पार्टियों को भी जान हथैली पर रखकर पोलिंग बूथों तक पहुंचना पड़ा। जिस तरह के हालात बन रहे हैं। उसके चलते अक्टूबर अथवा नवंबर माह वोटरों के साथ ही पोलिंग पार्टियों के लिए भी मुफीद साबित होगा।
इस तरह कहा जा सकता है कि खास कर चमोली के सरकारी अमले को इस साल चुनौतियों से ही जूझना पड़ेगा। अब देखना यह है कि इस कसौटी पर चमोली का सरकारी अमला किस तरह खरा उतरता है। इस पर ही उसकी असली परीक्षा भी होगी।

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