गोपेश्वर। राजकीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष प्रकाश चैहान ने कहा है कि चयन प्रोन्नत वेतनमान पर स्वीकृति पर अतिरिक्त वेतन वृद्धि रोकना शासन का शिक्षक विरोधी निर्णय है।
जिलाध्यक्ष चैहान ने बताया कि एक जनवरी 2016 को सातवां वेतनमान आयोग लागू हुआ था। तब से सितंबर 2019 तक शिक्षक-शिक्षिकाओं को चयन प्रोन्नत वेतनमान स्वीकृत होने पर वेतन वृद्धि का लाभ मिलता रहा। अब 13 सितंबर 2019 के शासनादेश को बाधित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि 2016 के नियम 13 में इस बात को रेखांकित किया गया है कि चयन प्रोन्नत वेतनमान स्वीकृति पर वेतन वृद्धि प्रदान की गई है। सरकार द्वारा अब द्वेषपूर्ण निणर्य लेकर इंक्रीमेंट को रोक दिया गया है। यह तब किया गया जब हाईकोर्ट द्वारा चयन प्रोन्नत वेतनमान स्वीकृति पर दिए गए इंक्रीमेंट की वसूली के सरकार के एक आदेश को गलत मान कर वसूली रोक दी गई। वसूल की गई राशि को वापस करने के आदेश भी जारी किए गए थे। इस तरह का आदेश विभाग ने भी जारी किया था।
चैहान बताया कि प्रदेश के डेढ लाख कर्मचारियों व 40 हजार निगम कर्मियों को चयन प्रोन्नत पर इंक्रीमेंट दिया जा रहा है किंतु शिक्षकों को इससे वंचित कर दिया गया है। कर्मचारियों को उनके पूरे सेवाकाल में 3 एसीपी मिलती है किंतु शिक्षको को चयन-प्रोन्नत वेतनमान। इसमें ही हजारों शिक्षकों को पूरे सेवाकाल में एक भी प्रमोशन नहीं दिया जा रहा है। यह समानता के अधिकार अनुछेद 14 का भी उल्लघंन है। बताया कि इस मसले को लेकर कई शिक्षक हाईकोर्ट चले गए है। संघ की मांग है क मूल वेतन नियम 2016 के प्रस्तर 13 के अनुसार पूर्व की भांति प्रोन्नत वेतनमान स्वीकृति पर हर हाल में अतिरिक्त वेतन वृद्धि अनुमन्य होनी चाहिए।
संघ के अध्यक्ष चैहान ने प्रदेश के राजकीय विद्यालयों के स्कूल समय सारणी में बदलाव का भी विरोध किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्ष भर एक ही टाइम टेबल निर्धारित किया जा रहा है। विद्यालयों को प्रातः 8.50 बजे खोला जाएगा और अपराह्न 3.15 बजे छूट्टी का प्रावधान किया गया है। जबकि मौजूदा व्यवस्था में ग्रीष्मकाल व शीतकाल में स्कूलों के खुलने एवं छूट्टी के लिए अलग-अलग समय सारणी निर्धारित की गई। यह निर्णय पूरी तरह अव्यवहारिक है। पहाड़ी जनपदों में शीतकाल में बच्चे 5-10 किमी पैदल चल कर आते है। वहां प्रातः 8.50 स्कूल खोलना तार्किक नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि इस निर्णय का भी पूरजोर विरोध किया जाएगा।
