गोपेश्वर। सेना की गढ़वाल स्काउट्स बटालियन की भक्तिमय बैंड धुन के बीच हिमालय की गोद में बसे पवित्र तीर्थ स्थल श्री हेमकुंड साहिब के कपाट शनिवार को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। 23 मई को शुरू हुई इस वर्ष की यात्रा मे लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव किया। कपाट बंद होने के अवसर पर करीब 4 हजार श्रद्धालु इस वर्ष की अन्तिम अरदास मे शामिल हुए। इसी के साथ लक्ष्मण मंदिर-लोकपाल तीर्थ के कपाट भी शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
कपाट बंद समारोह की शुरुआत सुखमणी साहिब पाठ से हुई। जिसके बाद शबद कीर्तन, अंतिम अरदास व हुक्मनामा के बाद पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब को शतखंड मे सुशोभित किया गया। पंज प्यारों के नेतृत्व में शोभायात्रा में कीर्तन और “बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के जयघोष के बीच लगभग चार हजार श्रद्धालु इस आयोजन मे सरीक हुए।
बताते चलें कि श्री हेमकुंड साहिब-लोकपाल 15,200 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। लोकपाल के नाम से प्रसिद्ध यह स्थान अपनी शांति और पवित्रता के लिए जाना जाता है। हिमाच्छादित पर्वत, पुष्प घाटी, और सरोवर का प्राकृतिक सौंदर्य धार्मिक यात्रियों, पर्यटकों और ट्रैकर्स को आकर्षित करता है।
इस वर्ष लगभग 4 लाख 89 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। हेमकुंड साहिब मैंनेजमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन नरेन्द्रजीत सिंह बिंद्रा ने मौसम की चुनौतियों व बर्फबारी के बावजूद आए यात्रियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु से विनम्रता और परमात्मा में विश्वास के साथ दर्शन के लिए पहुंचे। परमात्मा सफल यात्रा के साथ मनोकामना भी पूर्ण करेंगे। ट्रस्ट के मुख्य प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने सफल यात्रा संचालन मे सहयोग के लिए स्थानीय प्रशासन, पुलिस प्रशासन, वन विभाग, पेयजल विभाग, विद्युत विभाग, स्थानीय ग्रामीणों व व्यापारियों का आभार जताया। उन्होंने यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, मुस्तैदी और कुशल प्रबंधन के लिए प्रभारी निरीक्षक गोविन्दघाट चित्रगुप्त सिंह तथा चैकी प्रभारी घांघरिया अमनदीप सिंह’ की विशेष रूप से सराहना करते हुए आभार जताया। इस अवसर पर गुरुद्वारा श्री हेमकुण्ड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के मैनेजर मोनू सिंह, ग्रन्थी हामिद सिंह समेत तमाम लोग मौजूद रहे।
मौजूदा साल में रिकार्ड तोड 3 लाख 84 हजार 573 से अधिक श्रद्धालुओं ने उच्च हिमालय में स्थित हेमकुंड साहिब में मत्था टेका।
हेमकुंड साहिब-लोकपाल के कपाट शीतकाल के लिए बंद
