गोपेश्वर। चमोली जिला प्रशासन के सामने इसी माह गैरसैंण में आयोजित होने जा रहे विधानसभा सत्र को लेकर चुनौती आ खड़ी हो गई है। इसके चलते प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था समेत तमाम तैयारियों के मोर्चे पर अग्नि परीक्षा के दौर से गुजरना पड़ेगा।
दरअसल इसी साल विधानसभा को बजट सत्र 9 से 13 मार्च तक गैरसैंण के भराड़ीसैंण में संपन्न हुआ था। इसके चलते माना जा रहा था कि मानसून सत्र देहरादून में ही होगा। इसके बावजूद अब जबकि विधानसभा के चुनाव सिर पर हैं तो पुष्कर सिंह धामी सरकार ने यह सत्र भराड़ीसैंण में ही इसी माह आयोजित करने का संकल्प लिया है। पर्वतीय जनमानस को गैरसैंण में मानसून सत्र आयोजित करने के राजनीतिक निहितार्थ भी निकाले जाने लगे हैं। कहा जा सकता है कि सरकार इस बार चुनाव के दौरान गैरसैंण कार्ड खेलने की दिशा में आगे बढ़ गई है। वैसे 2025 में भी सरकार ने भराड़ीसैंण में 19 से 21 अगस्त तक मानसून सत्र का आयोजन किया था। हालांकि तब बजट सत्र 18 फरवरी से देहरादून में संचालित किया गया था। 2025 में ही देहरादून में रजत जंयती वर्ष पर 3 नवंबर को विशेष सत्र आयोजित किया गया था। ऐसा इसलिए कि उत्तराखंड राज्य स्थापना की 25 वीं वर्षगाठ पर यह विशेष सत्र आयोजित किया गया। 2024 में 5 फरवरी से बजट सत्र देहरादून में आयोजित किया गया। मानसून सत्र 21 से 23 अगस्त तक ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में किया गया। यानी 2024 से भराड़ीसैंण में मानसून सत्र की शुरूआत की गई। हालांकि भराड़ीसैंण में बजट सत्र भी होते रहे।
अब जबकि इसी माह भराड़ीसैंण में विधानसभा का सत्र आयोजित होने जा रहा है तो चमोली जिला प्रशासन के सामने सत्र को बेहतर ढ़ग से संचालित करने की चुनौती आ खड़ी हो गई है। इस बीच माननीयों के साथ ही सरकारी अमले की व्यवस्था करना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। चूंकि मौजूदा विधानसभा का यह सिर पर आते चुनाव को लेकर अंतिम सत्र होने जा रहा तो इस बार तमाम राजनीतिक दलों के साथ ही विभिन्न संगठनों द्वारा अपनी मागों को मनवानें के लिए गैरसैंण कूच अथवा विधानसभा कूच के कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। इसके चलते सुरक्षा व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार को अतिरिक्त सतर्कता तो बरतनी ही होगी अपितु सुरक्षा व्यवस्था को भी चाक चैबंद करना होगा। यह सब शांति पूर्ण ढ़ग से करना होगा।
वर्ष 2014 से गैंरसैंण में विधानसभा सत्रों की शुरूआत हुई थी। इसके चलते चमोली के सरकारी अमले को व्यवस्था में जुटना पड़ता है। यह सिलसिला अब तक जारी है। कहा जा सकता है कि चमोली के सरकारी अमले को अब जल्द होने जा रहे सत्र की तैयारियों में जुटकर व्यवस्थाओं को चाक चैबंद करना होगा। व्यवस्थाओं को बनाना ही सरकारी अमले की अग्नि परीक्षा भी होगी।
कई माननीयों के लिए यह आखिरी पारी भी
इस बार गैरसैंण में होने जा रहे सत्र को लेकर कई माननीयों के लिए यह अंतिम सत्र अथवा आखिरी पारी भी होगी। ऐसा इसलिए कि अब जल्द विधानसभा के चुनाव होने हैं तो कई विधानसभा की देहरी तक नहीं पहुंच पायेंगे। यह सब राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। कहा जा सकता है कि कई माननीयों के लिए यह आखिरी पारी भी होगी। इसलिए इस बार ज्यादातर विधायक चुनाव मैदान में उतरने से पूर्व विधानसभा सत्र के दौरान दमखम दिखाएंगे। इस बार विधायकों की अतिरिक्त सक्रियता देखने को मिलेगी। विपक्ष भी सरकार की घेरेबंदी में कई कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगा। सत्तापक्ष के विधायक भी सदन के भीतर आक्रामक तेवरों में दिखाई देंगे। चूंकि विधायकों को जनता को 5 साल का हिसाब किताब देना है तो यह सत्र उनके लिए भी किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होगा।
चमोली के सरकारी अमले के सामने गैरसैंण विस सत्र की चुनौती
