बदरीनाथ में लोक संस्कृति और सैन्य तकनीक का अद्भुत समागम

बदरीनाथ में लोक संस्कृति और सैन्य तकनीक का अद्भुत समागम

गोपेश्वर ! बदरीनाथ धाम में लोक कलाकारो की शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सैन्य तकनीक का अद्भुत समागम देखने को मिला। इसके चलते बदरीनाथपुरी लोक संस्कृति के रंग से सरोबार रही। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देश की प्राचीन विरासत, सनातन संस्कृति और आस्था के केंद्रों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।
भारतीय सेना तथा चमोली जिला प्रशासन के सयुक्त तत्वाधान में बदरीनाथ धाम में आयोजित दो दिवसीय देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026 के दूसरे दिन लोक संस्कृति, स्थानीय हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद तथा आधुनिक सैन्य तकनीक का अनूठा समागम देखने को मिला। स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों की ओर से तैयार किए गए स्थानीय उत्पाद और हस्तशिल्प प्रदर्शनी कार्यक्रम के खास आकर्षण रहे। भारतीय सेना की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी में सैन्य साजो-सामान, तोपों के साथ ही कृतिम बुद्धिमता (एआई) तकनीक से लेस आधुनिक सैन्य उपकरणों की झलक देख लोग अभिभूत हो उठे।

सीएम धामी बोले लोक संस्कृति के संरक्षण पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बदरीनाथ धाम में आयोजित महोत्सव में प्रतिभाग करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की प्राचीन विरासत, सनातन संस्कृति और आस्था के केंद्रों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड के प्रमुख तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार के साथ ही उनकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति के संरक्षण, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने में इस तरह के महोत्सव कारगर साबित होंगे। उन्होंने इस दौरान विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेता तथा उपविजेता प्रतिभागियों को पुरूस्कृत कर संमानित किया। उन्होंने स्थानीय उत्पादों, महिला स्वयं सहायता समूहों के हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजनों तथा अन्य प्रदर्शनी स्टाॅलों को अवलोकन भी किया। स्थानीय उत्पादों एवं पहाड़ी व्यंजनों की जानकारी लेते हुए स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की सराहना की। सीएम ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को पर्यटन से जोड़ने से सीमांत क्षेत्रों में आजिविका के नए अवसर सृजित होंगे।
सीएम धामी ने भारतीय सेना द्वारा लगाई गई सैन्य प्रदर्शनी का भी अवलोकन कर अत्याधुनिक हथियारों एवं उपकरणों की जानकारी ली। कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनी युवाओं को भारतीय सेना की कार्यप्रणाली से परिचित कराने के साथ ही उनमें राष्ट्र सेवा और देश भक्ति की भावना को और मजबूत करती है। कहा कि भगवान बदरीविशाल की पावनधरा पर आयोजित सांस्कृतिक महोत्सव से पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखने में मदद मिलेगी। उनका कहना था कि देवभूमि उत्तराखंड की आत्मा उसकी लोक संस्कृति में बसती है। यहा के लोक नृत्य, लोकगीत, परंपराएं और रीति रिवाज ही उत्तराखंड की विशिष्ठ पहचान हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ो से जोड़ने के साथ ही सीमांत क्षेत्र के युवाओं को भारतीय सेना में सेवा के लिए प्रेरित करते हैं।
हमारी विरासत, हमारा भविष्य की थीम पर आयोजित महोत्सव में महिला स्वयं सहायता समूहों ने स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक हस्तशिल्प के माध्यम से पहाड़ की कला और हुनर का प्रदर्शन किया। देश-विदेश से आए तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों ने इन उत्पादों के प्रति खासी रूचि दिखाई।
इस दौरान पर जीओसी-इन-सी सेंट्रल कमान लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, जीओसी उत्तर भारत एरिया लेफ्टिनेंट जनरल डी.जी. मिश्रा, ब्रिगेडियर गौरव बत्रा, जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार सहित भारतीय सेना के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्थानीय नागरिक, युवा, विद्यार्थी एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए अतिथि मौजूद रहे।

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