गोपेश्वर। चमोली जिले के देवाल ब्लाॅक के दूरस्थ पिनांऊ गांव की गर्भवती महिला को सड़क के अभाव में 6 किमी पैदल पालकी के सहारे सड़क मार्ग तक पहुंचना पड़ा। कहा जा सकता है कि गर्भवती महिला को पालकी ही सहारा बनी।
दरअसल पूर्व विधायक द्विवंगत शेर सिंह दानू तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मेजर देव सिंह दानू का गांव अभी भी सड़क से नहीं जुड़ पाया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत तथा त्रिवेंद्र सिंह रावत की घोषणा के बाद भी पिनांऊ गांव तक सड़क न बनने से खासकर बीमारों तथा गर्भवती महिलाओं को जीवन संघर्ष से जूझना पड़ रहा है। इसके बावजूद दूरस्थ क्षेत्र के ग्रामीणों का कोई पूछनहार नहीं है।
पिनांऊ गांव की आंगनवाड़ी वर्कर खिमुली देवी को यकायक प्रसव पीड़ा हुई। इसके चलते परिजनों ने पालकी के जरिए गर्भवती महिला को 6 किमी पैदल चलकर बलाण गांव के कालीताल पहुंचाया। पिनांऊ से बलाण गांव का पैदल मार्ग क्षतिग्रस्थ होने के चलते ग्रामीणों ने स्वयं ही रास्ता बनाकर गर्भवती को पाटिंगधार तक लाये।
ग्राम प्रधान लखपत दानू ने बताया कि करीब 6 किमी पैदल पालकी के जरिए महिला को पाटिंगधार लाया जा सका। हालांकि महिला के लिए हेली सेवा का इंतजार भी किया जाता रहा। हेली के न पहुंचने से सड़क मार्ग से महिला को कालीताल सड़ंक तक लाने पर उसे देवाल पीएचसी लाया गया। देवाल में डाक्टर न होने पर महिला को एंबुलेंस से बागेश्वर जिला अस्पताल ले जाया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क मार्ग के अभाव में बीमारों तथा गर्भवती महिलाओं को हमेशा ही जीवन संघर्ष से जूझना पड़ रहा है। यह स्थिति चिंताजनक बनती जा रही है। उन्होंने दूरस्थ गांव तक सड़क निर्माण की मांग की है। फिलहाल तो सड़क मार्ग न होने से सिस्टम पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
सड़क नहीं बनी तो गर्भवती महिला को पालकी बनी सहारा
