गोपेश्वर। विवादों में घिरी श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) मे कर्मचारियों की पदोन्नति न होने से व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट आ पा रही है। बीकेटीसी के द्वारा प्रोन्नति मामले को लटकाये रखने से कर्मचारियों में मायूसी के साथ ही आक्रोश भी बढ़ने लगा है। इसके बावजूद कमेटी हाथ पर हाथ धरे बैठी है। इसके चलते ही कर्मचारियों के नियमितीकरण का मामला भी लटका पड़ा है।
दरअसल देश की प्रतिष्ठित मानी जाने वाली श्री बदरीनाथ-केदारनाथ समिति मौजूदा दौर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के प्रकाश में आने से विवादों में आ घिर गई है। इसके चलते बीकेटीसी आम लोगों के निशाने पर आ गई है। बीकेटीसी की विवादास्पद कार्यप्रणाली के चलते भाजपा सरकार भी असहज स्थिति में है। मंदिर समिति के कर्मचारी पदोन्नति तथा नियमितीकरण न होने के चलते हैरान परेशान हैं। पदोन्नति न होने के चलते चहेतों को मुख्य पदों पर बैठाने के चलते अव्यवस्था के कारण ही चढ़ावा चोरी की घटना को बल मिला है। इसके बाद भी चहेतों पर ही बीकेटीसी प्रबंधन का भरोसा कम नहीं हुआ है।
बीकेटीसी के बदरीनाथ मंदिर तथा केदारनाथ मंदिर अधिष्ठान में सैकड़ों कर्मचारी तैनाथ है। मौजूदा दौर में करीब 200 स्थाई तथा 350 सीजनल और अस्थाई कर्मचारी बीकेटीसी में नियुक्त है। इसके बावजूद स्थाई कर्मचारियों की पदोन्नति का मामला लटका पड़ा है जबकि अस्थाई कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया भी ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। इसके चलते मंदिर समिति के उच्च पदाधिकारी अपने चहेतों को महत्वपूर्ण स्थानों पर बैठाकर वरिष्ठ कर्मचारियों की उपेक्षा कर रहे है।
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति कर्मचारी संघ के अध्यक्ष बिजेंद्र ंिसंह बिष्ट ने बताया कि मंदिर समिति के कर्मचारियों की लंबित एवं जायज मांगों पर गौर ही नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा जारी बीकेटीसी की 2023 की नियमावली के अनुसार कर्मचारियों की पदोन्नति किए जाने के लिए लगातार गुहार लगाई जा रही है। इसके लिए बीकेटीसी अध्यक्ष तथा मुख्यमंत्री को पत्र भेजे जा रहे है। फिर भी बीकेटीसी उनकी मांगों पर गौर ही नहीं कर रही है। पदोन्नति के लिए 2023 की नियमावली के अनुसार तत्काल डीपीसी बैठाकर प्रोन्नति का मार्ग प्रशस्त किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी बीकेटीसी के सभी अस्थाई कर्मचारियों के स्थाईकरण/नियमितीकरण की घोषणा की है। केदारनाथ उपचुनाव के दौरान सीएम ने यह घोषणा की थी। इसके तहत वन टाईम सेंटलमेंट अथवा समान कार्य के समान वेतन देने की गुहार लगातार लगाई जा रही है। अस्थाई तथा सीजनल कर्मचारियों के लिए भी कोई ठोस प्रावधान नहीं किया जा रहा है। सीजनल कर्मचारियों के 6 माह के शासनादेश को संशोधित करते हुए वर्षभर का नया शासनादेश जारी करने की मांग को भी अनदेखा किया जा रहा है। इस तरह का शासनादेश जारी न होने तक सीजनल कर्मचारियों को भी समान कार्य के लिए समान वेतन देने की व्यवस्था को भी अमल में नहीं लिया जा रहा है। कई वरिष्ठ कर्मचारियों के रिटायर होने के बाद खाली पड़े पदो की भरपाई प्रमोशन से ही हो सकती है। इसके बावजूद प्रमोशन की प्रक्रिया पर गौर ही नहीं किया जा रहा है। इससे रिक्त पदो पर अस्थाई कार्मिकों की नियुक्ति भी नहीं हो पा रही है। यहां तक कि बीकेटीसी द्वारा पूर्व में जारी प्रतिनियुक्ति/संविदा के आधार पर विज्ञप्ति को भी निरस्त करने की मांग की जा रही है। पदोन्नति के पश्चात रिक्त पदों को भरने के लिए अस्थाई कर्मचारियों के लिए विज्ञप्ति जारी कर अस्थाई नियुक्ति की मांग को भी लटकाया जा रहा है।
इस तरह कहा जा सकता है कि मौजूदा कमेटी ने कर्मचारियों के मसलों के निस्तारण पर फोकस करने के बजाय सभी मामलों को ठंड़े बस्ते में डाल दिया है। कहा जा सकता है कि सैंकड़ों कर्मचारियों की पदोन्नति और नियमितीकरण पर कमेटी का ग्रहण लग गया है। हालांकि इससे पूर्व की अजेंद्र अजय के अध्यक्षीय नेतृत्व वाली कमेटी ने कई कर्मचारियों के प्रमोशन कर अस्थाई कर्मचारियों के स्थाईकरण की दिशा में कदम बढ़ा दिए थे किन्तु कमेटी का कार्यकाल खत्म होनें के चलते फाइल ठंड़े बस्ते में चली गई। मौजूदा कमेटी इस मसले को लेकर कही कोई पहल करती हुई नहीं दिखाई दे रही है।
बीकेटीसी कर्मचारियों के प्रमोशन पर कमेटी का ग्रहण
