गोपेश्वर। नंदा देवी की 5 सितंबर से शुरू होने जा रही लोकजात यात्रा के लिए तैयारियां शुरू हो गई है। इसके तहत लोकजात यात्रा का समापन 25 सितंबर को होगा।
नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से शुरू होने वाली हर साल की नंदा लोकजात यात्रा को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है। नंदा देवी राजराजेश्वरी मंदिर समिति कुरूड़ के अध्यक्ष नरेश गौड़, जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर इस आशय की जानकारी दी। उन्होनें बताया कि 5 से 25 सितम्बर तक चलने वाली लोकजात यात्रा 21 पड़ावों से होते हुए निकलेगी। उन्होनें कहा कि इस साल नंदा की बड़ी जात को लेकर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। इसके चलते देव डोली तथा पुजारियों को सुरक्षा प्रदान किया जाना चाहिए। बताया कि लोकजात यात्रा नंदा देवी मंदिर कुरूड़ से प्रारंभ होकर विभिन्न पड़ावों होते हुए वेदनी कुंड तक जाएगी। नंदा सप्तमी की जात पर वेदनी कुंड में पूजा अर्चना और मेले के बाद देव डोली बांक होते हुए नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा के प्रवास पर लौट आएगी।
कार्यक्रम के अनुसार 5 सितम्बर को सिद्धपीठ कुरूड़ परगना नंदाक बधाण की नंदा की देव डोली कुरूड़ से प्रस्थान कर रात्रि प्रवास के लिए चरबंग पहुंचेगी। इसी तरह अगले दिन चरबंग से मथकोट, 7 को उस्तोली, 8 को भेंटी, 9 को डुंग्री, 10 को सूना, 11 को चेपड़ो, 12 को धरातल्ला, 13 को इच्छोली, 14 को फल्दिया गांव, 15 को मुंदोली, 16 को वाण गांव के प्रवास पर रहेगी। वाण में नंदा और लाटू देवता के मिलन के बाद अगले दिन 17 सितम्बर को देव डोली निर्जन पड़ाव गैरोलीपातल के प्रवास पर रहेगी। 18 को वेदनी में अमुक्ता भरणी नंदा सप्तमी की जात के पश्चात देव डोली वापस बांक गांव के प्रवास पर रहेगी। पं. नरेश गौड़ ने बताया कि 19 को देव डोली ल्वाणी, 20 को उलंग्रा, 21 को बेराधार, 22 को गोठिंड़ा, 23 को कुराड़, 24 को ड़ाखोली तथा 25 को सिद्धपीठ देवराड़ा में पूजा अर्चना के बाद 6 माह के प्रवास के लिए नंदा राजराजेश्वरी सिद्धपीठ देवराड़ा मंदिर के गर्भगृह में विराजमान होगी। उन्होनें बताया कि नंदा राजराजेश्वरी के सभी पड़ावों की समिति से विचार विमर्श के बाद यह कार्यक्रम जारी किया गया है।
इस दौरान समिति के संरक्षक राजेश गौड़, बच्ची राम गौड़, दयाराम गौड़, धनीराम, योगेश्वर आदि मौजूद रहे। समिति के उपाध्यक्ष किशोर गौड़, सचिव सुनील गौड़ तथा कोषाध्यक्ष देवराम गौड़ ने सभी लोगों से लोकजात यात्रा में प्रतिभाग की अपील की है।
