गोपेश्वर। बदरीनाथ विधानसभा सीट पर भाजपा की तरह कांग्रेस में भी मौजूदा विधायक की दावेदारी को चुनौती मिलने लगी है। इसके चलते अब कांग्रेसी सियासत में भी दावेदारी को लेकर घमासान के आसार बढ़ गए हैं।
बताते चले की बदरीनाथ विधानसभा सीट पर भाजपा के भीतर दावेदारी को लेकर घमासान छिड़ा हुआ है। हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा से यह सीट छीन कर अपनी झोली में डाल दी थी। तब कांग्रेस के राजेंद्र सिंह भंडारी जीत दर्ज करने में सफल हुए थे। गढ़वाल संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत एक मात्र बदरीनाथ विधानसभा की सीट ही कांग्रेस के पाले में गई थी। बाकी 13 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। वर्ष 2024 में यकायक तत्कालीन कांग्रेस विधायक राजेंद्र सिंह भंडारी भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके चलते उन्होनें इस्तीफा दे डाला था। उप चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी लखपत बुटोला ने जीत दर्ज कर भाजपा प्रत्याशी भंडारी को शिकस्त दी थी। इसके चलते भाजपा से भंडारी तथा कांग्रेस से बुटोला की आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर स्वाभाविक दावेदारी बनी हुई है। हालाकि भाजपा में भंडारी के इतर तमाम नेता दावेदारी की ताल ठोककर भंडारी की एकतरफा दावेदारी को चुनौती दे रहे हैं। इसके चलते भाजपा में दावेदारी को लेकर घमासान छिड़ा हुआ है।
कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला अब तक अपनी दावेदारी को लेकर काफी आश्वस्त चल रहे थे। ऐसा इसलिए भी कि 2024 के उप चुनाव में उन्होने भाजपा प्रत्याशी को मात देकर कांग्रेस की सीट को बरकरार रखा था। इस बीच लगातार विधायक बुटोला गांव-गांव जाकर आगामी चुनाव की तैयारी को लेकर सक्रियता प्रदर्शित कर रहे हैं। अब उनकी दावेदारी को पार्टी के भीतर से ही चुनौती मिलने लगी है। जोशीमठ के पूर्व प्रमुख प्रकाश रावत ने 2024 में भी दावेदारी पेश की थी। इसके बावजूद हाईकमान ने बुटोला को उम्मीदवार बनाया। हालांकि प्रकाश रावत हाईकमान के फैसले के अनुसार पार्टी प्रत्याशी की जीत को लेकर पूरी समर्पित होकर काम करते रहे। इस बार फिर उन्होनें सक्रियता प्रदर्शित कर दावेदारी की ताल ठोक दी है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गौरव फरस्वाण ने भी दावेदारी जता कर कांग्रेसी राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। दशोली ब्लाॅक के फरस्वाण सक्रिय राजनीति में तो हैं ही अपितु सामाजिक सरोकारों से जुड़कर आम लोगों में पैठ बनाए हुए हैं। अब उनकी दावेदारी को उनके समर्थक हल्के में नहीं ले रहे है। समर्थकों का कहना है कि इस अभी नहीं तो कभी नहीं के फाॅर्मूले पर चलकर दावेदारी को बल दिया जाएगा। इस तरह फरस्वाण की दावेदारी ने कांग्रेस शिविर में सियासत को गर्म कर दिया है।
जोशीमठ के ही कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता रहे कमल रतूड़ी ने भी कहा वह इस बार भी अपनी दावेदारी से पीछे नहीं हटे है। 2024 में भी उप चुनाव के दौरान उन्होनें दावेदारी जताई थी। अबकी बार वह दावेदारी पर कायम हैं। इस तरह फिलहाल मौजूदा विधायक की दावेदारी को चुनौती देने के लिए तीन अन्य दावेदारों की मैदान में उतरने से कांग्रेसी सियासत में घमासान छिड़ने ंके आसार बढ़ गए हैं। अब देखना यह है कि दावेदारी को लेकर चल रहा संग्राम क्या गुल खिलाता है। फिलहाल तो कांग्रेसी सियासत में घमासान तो छिड़ ही गया है।
