गोपेश्वर। जुलूस प्रदर्शनों के हिसाब से विधानसभा के बजट सत्र के शुरूआती दो दिन पुलिस के लिए अग्नि परीक्षा से कम नहीं होंगे। इसके चलते पुलिस को मुस्तैदी के साथ मोर्चे पर डटे रहना होगा।
दरअसल विधानसभा चुनाव की तैयारियों का साल होने के चलते इस बार नौ से 13 मार्च तक भराड़ीसैण में होने जा रहे विधानसभा सत्र को लेकर राजनैतिक दलों तथा तमाम संगठनों के जुलूस प्रदर्शन भी होंगे। इसके जरिए राजनैतिक दल अपनी मौजूदगी का एहसास तो कराएंगे ही अपितु जन मुद्दों को लेकर अपनी प्रतिबद्धता का भी इजहार करेंगे। इन्हीं मुद्दों को लेकर विपक्षी दल चुनाव मैदान में सत्तारूढ़ दल को चुनौती देंगे। इस तरह कहा जा सकता है कि सत्र के शुरूआती दो दिनों में उत्तराखंड क्रांति दल तथा कांग्रेस के जुलूस प्रदर्शन पुलिस के लिए चुनौती भरे होंगे। सत्र के शुरूआती दिन यानि नौ मार्च को उत्तराखंड की स्थाई राजधानी गैरसैण बनाए जाने को लेकर उक्रांद का विधानसभा घेराव का कार्यक्रम घोषित किया गया है। इस मुद्दे को हवा देने के लिए उक्रांद इस बार पैने तेवरों के साथ अपना शक्ति प्रदर्शन भी करेगा। चुनावी तैयारियों का साल होने के चलते सरकार की ओर से आंदोलनकारी कार्यकर्ताओं के साथ ज्यादा सख्ती भी नहीं होगी। उक्रांद मौजूदा दौर में भाजपा तथा कांग्रेस का विकल्प बनने के प्रयासों में जुटा हुआ है। ऐसे में उनकी विधानसभा घेराव की काॅल किस तरह असरकारी होती है यह सब नौ मार्च को दिखाई देगा। सत्ता पक्ष की ओर से दीवालीखाल से आगे न बढ़ने देने के लिए भरपूर प्रयास होंगे। इस तरह पुलिस को शांतिपूर्ण तरीके से उक्रांद के विधानसभा घेराव से निपटना होगा।
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी मंहगाई, बेरोगारी समेत तमाम मसलों को लेकर 10 मार्च को रैली के आयोजन की घोषणा की है। कांग्रेस पिछले 2017 से सत्ता के लिए जदोजहद में जुटी हुई है। आगामी साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस भी शक्ति प्रदर्शन से पीछे नहीं हटेगी। ऐसे में कांग्रेसी विधानसभा परिसर की ओर न बढ़ पाएं इसके लिए पुलिस को दीवालीखाल तथा हेलीपैड की ओर चैकस निगाह रखनी होगी। इसके चलते कांग्रेसी हेलीपैड तथा दीवालीखाल में ही अपने शक्ति का प्रदर्शन कर सकेंगे।
वैसे 2021 में भी बजट सत्र के दौरान कांग्रेस समेत अन्य संगठनों ने अपनी शक्ति का जोरदार प्रदर्शन किया था। इसी साल नंदप्रयाग-नंदानगर डेढ लाइन सड़क निर्माण को लेकर भराड़ीसैण जा रहे आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच जमकर बवाल हुआ था। इसी दौरान गैरसैण कमिश्नरी को लेकर भी विवाद खड़ हो गया था। इसके चलते तत्कालीन त्रिवेंद्र रावत सरकार की विदाई भी सत्र के समापन के दौरान ही हुई थी। हालांकि तब सरकार गैरसैण कमिश्नरी की घोषणा से पीछे हट गई थी और डेढ़ लाइन सड़क निर्माण का फैसला नई आई तीरथ सिंह रावत सरकार को लेना पड़ा था। इस बार सरकार को सधे कदमों के साथ आगे बढ़ना होगा। माना जा रहा है कि शुरूआती दो दिन पुलिस के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होंगे।
