मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ वामपंथियों ने भरी हुंकार

गोपेश्वर। संयुक्त किसान मोर्चा तथा केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने केंद्र सरकार की मजदूर और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन का विगुल फूंक दिया है।
किसान सभा के जिला मंत्री कमलेश गौड़, डीवाईएफवाई के गजेसिंह बिष्ट, विनोद जोशी, सीटू के जिला उपाध्यक्ष मदन मिश्रा, किसान सभा के अध्यक्ष बस्ती, उपाध्यक्ष कुंवर राम, लाल, संयुक्त सचिव ज्ञानेंद्र खंतवाल आदि ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि केंद्र सरकार की मजदूर-किसान विरोध नीतियों के कारण देश गहरे आर्थिक संकट में पड़ गया है। इसके तहत अखिल भारतीय स्तर पर इस तरह की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन करने को विवश होना पड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार अमीर तथा कार्पोरेट घरानों पर कर लगाने के बजाय उन्हें ऋण माफ कर रियायतें प्रदान कर रही है। देश की परिसंपत्तियों को कार्पोरेटरों के हवाले किया जा रहा है। इससे चौतरफा संकट गहराता जा रहा है। इन्होंने किसान विरोधी बीज कानून को वापस लेने, बिजली बिलों की वापसी, मनरेगा की बहाली तथा मनरेगा को सार्वभौम बनाकर कम से कम 200 दिनों का रोजगार और छह सौ रुपया प्रतिदिन की मजदूरी दिए जाने की वकालत की है। मजदूरों के हितकारी 29 समकानूनों की बहाली पर भी उन्होंने जोर दिया है।

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