गोपेश्वर। उत्तराखंड विधान सभा के चुनाव वर्ष 2027 में हरिद्वार में होने वाले अर्द्धकुंभ के चलते समय से पहले हो सकते हैं। इसके चलते ही भाजपा लगातार चुनावी तैयारियों में जुट कर इलेक्शन मोड में आ गई है।
दरअसल उत्तराखंड विधान सभा के चुनाव अगले साल 2027 में होने हैं। यानि सरकार का गठन 2027 मार्च माह में हो जाना है। मार्च सरकार गठन के लिए चुनाव को लेकर हरिद्वार कुंभ का पेंच फंस गया है। वर्ष 2027 में ही अर्द्धकुंभ होने जा रहा है। आगामी 2027 में मकर संक्रांति यानि 14 जनवरी को अर्द्धकुंभ का पहला स्नान होगा। इसके बाद अर्द्धकुंभ लगातार चलता रहेगा। इसके चलते अगले साल चुनाव होना अर्द्धकुंभ के चलते संभव नहीं होगा। इसके चलते विधान सभा के चुनाव अर्द्धकुंभ से पूर्व संपादित करने होंगे। ऐसे में इस बात की संभावना को बल मिल रहा है कि चुनाव अक्टूबर अथवा नवंबर माह में इसी साल हो सकते हैं।
अर्द्धकुंभ के चलते पूरा सरकारी अमला हरिद्वार में डटा रहेगा। अर्द्धकुंभ मकर संक्रांति से प्रारंभ होकर बैशाखी में अंतिम शाही स्नान तक चलते रहेंगे। इसमें चार माह तक का समय लेगा। इस तरह के हालातों के चलते इस अवधि में विधान सभा के चुनाव संपन्न कराना दोहरी चुनौती होगी। विधान सभा चुनाव में चुंकि पूरा सरकारी अमला जुटा रहेगा तो चुनाव कराना आसान नही होगा। हरिद्वार जनपद भी इससे अछूता नहीं रहेगा। राज्य का पुलिस महकमा भी पूरी तरह अर्द्धकुंभ में चैकस रहेगा। इसलिए चुनाव जैसा काम इस अवधि में कराना आसान भी नहीं होगा।
उत्तराखंड की नंदादेवी राजजात तो इस साल अगस्त से सितंबर माह तक संचालित होनी है। वर्ष 2014 की नंदा राजजात में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा था। इस साल भी जिस तरह सरकार तैयारियों में जुटी है तो नंदा राजजात के महाकुंभ में भी आस्था का सैलाब उमड़ पडे़गा। सरकार इस आयोजन में पूरे सरकारी अमले को झोंक कर रख देगी। सरकार इस धार्मिक आयोजन का लाभ अपने राजनैतिक प्रयोजन के लिए करने को कहीं कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। इसलिए माना जा रहा है कि यह साल नंदा राजजात को लेकर सरकारी अमले के लिए चुनौती का साल भी होगा। नंदा राजजात निपटने के पश्चात सरकार के सामने अक्टूबर अथवा नवंबर माह ही चुनावी दृष्टि से अनुकूल होंगे। इसके चलते विधान सभा चुनाव संपादित करने के लिए अक्टूबर अथवा नवंबर माह अनुकूल रहेंगे। चुंकि दिसंबर माह से हरिद्वार में सरकारी अमले को तैयारियों में डटे रहना पड़ेगा। इसलिए अक्टूबर अथवा नवंबर ही चुनाव के लिए बेहद मुफीद माना जा रहा है।
भाजपा ने तो जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार कार्यक्रम के तहत गांवों तक जन समस्याओं के निस्तारण के लिए बहुद्देशीय शिविर आयोजित कर इस बात के संकेत दे दिए है कि भाजपा पूरा तरह इलेक्शन मोड में आ गई है। वैसे भी भाजपा एक चुनाव से निपटती है तो अगले चुनाव के लिए तैयारियों में जुट जाती है। उत्तराखंड में भाजपा के तमाम कार्यक्रम इस बात को पुष्ट करते हैं। भाजपा के मुकाबले मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस चुनावी तैयारियों को लेकर कोई खास सक्रिय नहीं दिखाई देती है। अलबत्ता चुनाव की तिथि घोषित होने के बाद ही कांग्रेस चुनावी सक्रियता प्रदर्शित करती है। इस बार तो उत्तराखंड क्रांति दल भी विधान सभा चुनाव को लेकर काफी सक्रिय नजर आ रहा है। यूकेडी लगातार तमाम जन सरोकारों से जुड़े सवालों को लेकर भाजपा तथा कांग्रेस को निशाने पर लेते जा रही है। यानि इस बार यूकेडी भी पूरी तरह चुनावी मोड में आ गई है। अब देखना यह है कि इस तरह के हालातों के चलते चुनाव आयोग किस तरह के कदमों के साथ आगे बढ़ता है।
वैसे हरिद्वार में आम तौर पर हर 12 साल में महाकुंभ का आयोजन होता है। वर्ष 2010 में हरिद्वार में महाकुंभ का आयोजन हुआ था। इसके बाद 2021 में ग्रह नक्षत्रों की विशेष परिस्थिति के कारण 11 साल बाद यह आयोजन हुआ था। इससे पूर्व 1998 में हरिद्वार में महाकुंभ हुआ था। अब अगला महाकुंभ 2032 में गैर नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार आयोजित होना है। हरिद्वार में अर्द्धकंुभ तो 2027 में ही होना है।
