सिद्धपीठ कुरूड़ से नंदा की उत्सव ड़ोलियां शनिवार को कैलास होंगी रवाना

सिद्धपीठ कुरूड़ से नंदा की उत्सव ड़ोलियां शनिवार को कैलास होंगी रवाना

गोपेश्वर। नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से मां नंदा देवी की उत्सव डोलियां शनिवार को कैलास को रवाना होंगी।
नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से हर साल अगस्त अथवा सितंबर माह में मां नंदा की लोकजात यात्रा कैलास को जाती है। इसके तहत दशोली तथा बंड की नंदा की उत्सव ड़ोलियां तथा छंतोलियां बालपाटा जाती रही हैं तो बधाण की नंदा की उत्सव ड़ोली वेदनी बुग्याल को जाती है। हर 12 साल में नंदा राजजात कार्यक्रम का आयोजन होता है। इसके तहत नौटी से 280 किमी पैदल यह यात्रा होमकुंड में चैसिंग्या खाडू की विदाई के बाद वापस लौट आती है। इस यात्रा में नंदा की बधाण, दशोली, बंड समेत उत्तराखंड के तमाम इलाकों की नंदा की उत्सव ड़ोलियां भी शामिल होती हैं। हालांकि राजजात यात्रा अपने निर्धारित 12 साल की अवधि पर कभी भी खरा नहीं उतर पाई। इस साल नंदा राजजात होनी थी किन्तु कुछ धार्मिक कारणों का हवाला देकर राजजात यात्रा को 2027 में करने का ऐलान किया गया है। इस पर मतभेद उभर आने के कारण विवाद खड़ा हो गया है।
नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ की उपेक्षा का आरोप नंदा राजजात समिति पर लगता रहा है। इसके चलते इस साल नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ के तमाम लोगों की ओर से इसी साल राजजात के बजाए नंदा की बड़ी जात करने का संकल्प लिया गया। माना जा रहा था कि कुरूड़ में स्थित बधाण की राजराजेश्वरी की उत्सव डोली भी बड़ी जात में शामिल होगीं किन्तु हाल ही में बधाण समिति ने बड़ी जात में शामिल होने से इनकार कर दिया । बधाण की नंदा की उत्सव डोली लोकजात यात्रा के तहत वेदनी बुग्याल तक ही जाएगी।
कुरूड़ मंदिर में ही नंदा की दशोली की उत्सव डोली भी विराजमान रहती है। इसके चलते अब बड़ी जात में दशोली तथा बंड की उत्सव डोलियां तथा छंतोलियां शामिल होंगी। इसके तहत दोनों डोलियां चैसिंग्या खाडू के साथ होमकुंड जाएंगी। होमकुंड में चैसिंग्या खाडू की विदाई के बाद दोनों डोलियां अपने अपने गर्भगृह में प्रतिष्ठापित हो जाएंगी। बधाण की डोली तो वेदनी बुग्याल से वापस लौटकर 6 मास के प्रवास पर देवराड़ा मंदिर में रहेगी।
अब शनिवार को नंदा की दशोली तथा बंड की उत्सव ड़ोलियां बड़ी जात के तहत कैलास को रवाना होंगी। इसी तरह शनिवार को ही नंदा की बधाण की उत्सव डोली नंदा लोक जात के तहत कैलास को रवाना हो जाएगी।
मौसम भी इस बीच सामान्य नहीं हो पा रहा है। इसके चलते असामान्य मौसम के बीच नंदा की उत्सव डोलियों के साथ चलने वाले भक्तों को उच्च हिमालय में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि भक्तों में इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह व उमंग देखने को मिल रहा है। इसी उमंग, उल्लास व आस्था के चलते भक्तों की कैलास यात्रा में उमड़ने के आसार बने हुए हैं।

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