गोपेश्वर। राजनीतिक रणनीतिकार प्रंशात कुमार के नेतृत्व वाली जन सुराज पार्टी उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में हाथ आजमाने की तैयारी में है। इसके चलते उत्तराखंड के तमाम नेताओं से जन सुराज पार्टी के नेता पीके संपर्क में जुट गए हैं। अगले कुछ दिनों में जन सुराज पार्टी की धमक उत्तराखंड में देखने को मिलेगी।
दरअसल उत्तराखंड में अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव को लेकर देश के तमाम क्षेत्रीय दलों की नजरें उत्तराखंड पर भी गढ़ने लगी है। हालांकि उत्तराखंड में क्षेत्रीय दल के रूप में उत्तराखंड क्रांति दल भाजपा तथा कांग्रेस का विकल्प बनने की जद्दोजहद में लगा है। इसके बावजूद यह दल अभी तक विकल्प देने की स्थिति में खड़ा नहीं हो पाया है। इस बार यूकेडी लगातार सक्रिय हो कर आम लोगों को विकल्प देने का भरोसा दे रही है। इसके चलते यूकेडी पहली बार आम लोगों के बीच चर्चा में है। 2022 के विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी ने उत्तराखंड में अपनी सक्रियता बढ़ाई थी। इसके बावजूद आम आदमी पार्टी कोई खास प्रदर्शन नहीं कर पायी। इसके चलते पार्टी हासिए पर चले गई।
बिहार में प्रंशात कुमार के नेतृत्व वाली जन सुराज पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव में कोई खास प्रदर्शन नहीं कर पाई। इसके चलते यह पार्टी भी चुनाव के बाद नेपथ्य में चली गई थी। बिहार की बांकीपुर सीट के विधायक नितिन नवीन के भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने विधायकी को त्याग दिया था। इसके चलते बांकीपुर सीट खाली हो गई थी। उपचुनाव में पं्रशात कुमार ने हाथ आजमाया तो वह जीत दर्ज कर बिहार की सियासत में अपना अस्तित्व कायम कर गए। यह सीट पहले बीजेपी का गढ़ मानी जाती थी। प्रंशात किशोर की जीत ने बिहार की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। बिहार में पीके की जीत से जातीय सियासत को भी झटका लगा है।
अब जबकि उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने जा रहे है तो पार्टी के विस्तार के लिए पीके की नजर अब उत्तराखंड पर गढ़ गई है। पीके की ओर से उत्तराखंड में पार्टी की संभावनाओं को देखते हुए यहां के हासिए पर चले गए नेताओं से संपर्क साधा जा रहा है। पीके की ओर से 2012 में कर्णप्रयाग सीट से भाजपा के उंमीदवार रहे बहुगुणा विचार मंच के केंद्रीय संयोजक हरीश पुजारी से संपर्क साधा गया है। बताया जा रहा है कि पीके ने पुजारी से जन सुराज पार्टी की उत्तराखंड में संभावनाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की है। पुजारी ने पीके साथ हुई बातचीत की पुष्टि करते हुए बताया कि वे अन्य हस्तियों से भी इस मामलें में चर्चा कर हैं। उनका कहना है कि उन्होंने जन सुराज पार्टी की संभावनाओं को हरी झंड़ी दी है। बताया कि वह भी अब जन सुराज पार्टी को लेकर सक्रिय होने जा रहे हैं। पुजारी 1989 में अविभाजित उत्तर प्रदेश में कर्णप्रयाग सीट से जनता दल के उंमीदवार के रूप में भी चुनाव लड़े थे। वह तब मामूली अंतर से पराजित हो गए थे। 2012 के बाद भाजपा में उन्हें कोई तरजीह नहीं दी गई। इसके चलते वह अब जन सुराज पार्टी में अपना भविष्य तलाश रहे हैं।
इस तरह उत्तराखंड में जन सुराज पार्टी की आमद की चर्चाओं के चलते अब सियासत के गर्म होने के आसार बढ़ गए हैं। देखना यह है कि जन सुराज पार्टी उत्तराखंड में अपने पैर जमा पाती है अथवा नहीं। इस पर ही जन सुराज पार्टी का उत्तराखंड में विस्तार निर्भर करेगा।
