गोपेश्वर। चमोली जिले के दशोली विकास खंड के खल्ला गांव की श्री सती शिरोमणि माता अनसूया रथ डोली की देवरा यात्रा सकुशल संपन्न होने के साथ ही रविवार यानि 19 से 28 अप्रैल तक लक्ष महायज्ञ तथा श्रीमद देवी भागवत कथा के आयोजन को लेकर लोगों में गजब का उत्साह बना हुआ है। इसके निमित्त शनिवार को कठूड की ज्वाला देवी महायज्ञ में शामिल होने के लिए खल्ला गांव पहुंच रही है। इस तरह आज ही के दिन दोनों डोलियों का अद्भूत मिलन भी होगा।
बताते चलें कि अनादि काल से खल्ला गांव में स्थित अनसूया देवी की रथ डोली वर्ष 1974 में देवरा यात्रा पर निकली थी। 51 वर्षों बाद 2 अक्टूबर 2025 से देवरा यात्रा निकली। इस दौरान देव डोली खल्ला गांव पहुंच कर विभिन्न परिवारों अथवा घरों में प्रवास कर रही है। अब 19 अप्रैल से लक्ष महायज्ञ और श्रीमद देवी भागवत का आयोजन 28 अप्रैल तक होने जा रहा है। इसके चलते 28 अप्रैल को देव डोली गर्भगृह में प्रतिष्ठापित होगी। कथावाचक ऋषिकेश निवासी मनोज चमोली और यज्ञाचार्य खल्ला गांव निवासी डा. चंद्रशेखर तिवारी महायज्ञ तथा श्रीमद देवी भागवत कथा का संपादन करेंगे। इस तरह यह आयोजन धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण और सुफलदायी माना जा रहा है। इसी निमित्त कठूड गांव की ज्वाला देवी की डोली भी इस महायज्ञ में शामिल होने को शनिवार को ही खल्ला गांव पहुंच रही है। देव डोली के स्वागत के लिए ग्रामीणों ने पलक पांवडे बिछा लिए हैं। इस तरह दोनों देव डोलियों का मिलन अभूतपूर्व भी होगा। जिला मुख्यालय गोपेश्वर से मात्र 10 किमी की दूरी पर स्थित खल्ला गांव में इस महायज्ञ को लेकर गजब का उत्साह बना हुआ है। सभी ध्याणियां (विवाहिता बहिनें) तथा गांव के प्रवासी भी इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बनने के लिए गांव में डेरा डाल गए हैं।
क्या है मान्यता
सती शिरोमणि अनसूया देवी का विशाल मंदिर अनसूया आश्रम में स्थित है। खल्ला गांव में मां अनसूया की रथ डोली का मंदिर अनादि काल से स्थापित है। मान्यता है कि माता अनसूया मंदिर अनसूया आश्रम में संतान प्राप्ति का वरदान मांगने के लिए लोग आज भी दूर-दूर से आकर अपनी मनोकामना पूरी करते है। हर साल अनसूया मेला (दत्तात्रेय जन्म जयंती मेला) अनसूया आश्रम में लगता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मंदिर के अहाते व गर्भगृह में रात-भर जागकर ध्यान-जप करने से भक्तों के भाग्य जाग उठते हैं और उनकी कोख हरी हो जाती है। इस रात्रि जागरण के बीच नींद के किसी अलसाये झोंके में कोई स्वप्न दिख गया तो मान लिया जाता है कि करुण-मूर्ति देवी ने उनकी प्रार्थना सुन ली है। अखंड विश्वास और अटूट श्रद्धा के आगे सारे तर्क धरे के धरे रह जाते हैं। सदियों से रात्रि जागरण की यह परंपरा आज भी बदस्तूर जारी है।
देवी के दर्शन के लिए साल भर यहां लोग आते रहते हैं। संतान की प्राप्ति के लिए होने वाला रात्रि जागरण जुटता है एक खास विशिष्ट अवसर पर और तब यहां एक विशुद्ध धार्मिक मेला भी जुट जाता है। संतान की इच्छा वाली महिलाएं शाम से ही ध्यान जाप करने बैठ जाती हैं। इन्हें यहां की भाषा में बरोही् कहा जाता है।
पुराणों में माता अनुसूया को सर्वश्रेष्ठ संतानदायनि देवी बताया गया है। इसके पीछे भी एक कथा सर्वविदित है। बताया जाता है कि महर्षि अत्रि लम्बी तपस्या पर बैठे। कठोर तप देखकर देव घबरा गये। ब्रह्मा, विष्णु, महेश उनके पास गये। बोले-हम बेहद प्रसन्न हैं कहिए आपको क्या चाहिए। महर्षि बोले-तपस्या मेरा स्वभाव है मुझे कुछ नहीं चाहिए।
हां, सती अनसूया देवी से पूछ लो। तीनों देव माता के पास पहुंचे तो माता ने भी कुछ भी चीज मांगने से मना कर दिया। तीनों देवों को बहुत बुरा लगा।
तीनों देवों ने सोचा स्त्री की सबसे बड़ी संतान की होती है। क्यों न इस बारे इच्छा में पूछ लें। उन्होंने देवी से कहा-संतान की इच्छा तो होगी ही। देवी ने कहा-आप तीनों भी तो मेरे बच्चे हैं।
देवों ने सोचा यह कैसा उपहास है। इसे अहम हो गया है। तीनों देवों ने परीक्षा लेने की ठानी। उन्होंने देवी से कहा-तो तुम बच्चों के सामने नग्न रूप में आ जाओ। देवी के तप के बलबूते पर तत्कल तीनों देव शिशु बन गये। देवी ने उन्हें गोद में बिठा लिया। तीनों देवों को सत्य का अनुभव हुआ, उन्होंने माता से बरबस क्षमा भी मांगी। तदनन्तर में ब्रह्मा चंद्रमा के रूप में शिव दुर्वासा के रूप में व विष्णु ने दत्तात्रेय के रूप में जन्म लिया। तब से ही माता अनसूया श्पुत्रदाश् के रूप में विख्यात हैं।
माता अनसूया का अनसूया आश्रम में वर्तमान मंदिर ऐतवार गिरि स्वामी ने बनवाया है जो बेहद खूबसूरत व कलात्मक है। प्राचीन विशाल मंदिर १८०३ में आये विनाशकारी भूकम्प से समूचा नष्ट हो गया था। उस मंदिर को शंकराचार्य द्वारा निर्मित बताया जाता है। अभी भी उस मंदिर का अवशेष एक बड़ा पत्थर है जो वर्तमान मंदिर के पिछवाड़े में खड़े विशाल देवदार वृक्ष की चोटी पर अटका हुआ दिखाई देता है।
तो आइए इस महायज्ञ में शामिल होकर माता अनसूया का सुफल प्राप्त करें।
